Skip to content

मैं बड़ी लेखिका-कवियत्री नहीं हूँ । बचपन से ही शौक से लिखती हूँ । लंबे अंतराल के बाद हमसफ़र राज और पुत्र रिषभ के प्रेरित करने पर मेरी कलम फिर से शब्दों को पिरोने लगी है । मैं अपनी रचना "माँ की सीख-बेटी की टीस" अपने मम्मी-पापा को समर्पित करती हूं । विभिन्न पत्रिकाओं में लेख और कवितायें प्रकाशित होते हैं।
- सौ. सुमिता राजकुमार मूंधड़ा ।
sumitamundhra@gmail.com
"मेरी कलम से - मेरी कवितायें"

All Postsकविता (11)
होली
होली आज है रंगों का प्यारा त्यौहार, हर तरफ छाये अबीर और गुलाल । भंग से सजे हुए हैं सभी बाजार , मस्ती में झूम... Read more
परम्परा
परम्परा देखो जी , आज भी बेटी और बहू के लिए , हमारी परंपरायें भिन्न - भिन्न ही होती है । बेटी के लिए तो... Read more
शिव प्रार्थना
शिव प्रार्थना हर देव की महिमा है न्यारी , सबको पूजें हम बारी -बारी। इस जगत के पालनहारी , हे शिवशंकर हे त्रिपुरारी ।। सुन... Read more
मेरे शुभचिंतक
सौ . सुमिता राजकुमार मूंधड़ा Sumitamundhra@gmail.com मेरे शुभचिंतक मेरा जीवन का हर लम्हा बड़ा ही पारदर्शी है , और मेरे प्यारे शुभचिंतक बहुत ही दूरदर्शी... Read more
मकर सक्रांति
सौ.सुमिता राजकुमार मूंधड़ा मकर संक्रांति ___________ समय - समय पर देते हैं , हमारे त्यौहार हमें संदेश । प्यार से रहना सीखो बंधु , छोड़... Read more
भारत का कोहिनूर
           भारत का कोहिनूर                ------------------------ अपने कर्मों से भारत का उज्जवल भविष्य सजाया । उत्तराधिकार का उनके जीवन में ना था कोई साया... Read more
शुभ गणेशोत्सव
शुभ गणेशोत्सव जय-जय-जय गणपति गणराज, पूर्ण करो भक्तों के सब काज। गणेशोत्सव का करने आगाज़, उमड़ रहें हैं भक्त सब आज।। शिव-पार्वती के हो अभिमान,... Read more
मेरा अस्तित्व
मेरा अस्तित्व कोई बात हो मुझमें भी ऐसी स्वयं पर मैं अभिमान करूँ । अपना अस्तित्व बनाने हेतू अपने जीवन का दान करूँ ।। अपने... Read more