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हम फकीरों का बस इतना सा फ़साना है,
न अम्बर मिला न ज़मीं पे आशियाना है।

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नन्हीं गुड़िया
मैं नन्ही सी प्यारी गुडिया मम्मी की दुलारी गुडिया चंदा है मामा मेरे पापा के मन न भाई गुडिया मुझे उठाया पास बिठाया साथ ले... Read more
गज़ल
मेरे रहबर, मेरे मेहरम, सनम मुझ पर अहसान करो, मैं तूफानों का पाला हूँ, न मंजिल तुम आसान करो। जमीं हूँ मैं मुहब्बत की, न... Read more
सागर उदास है
उस सागर की क्या बात सुनाऊँ वो आजकल उदास रहता है। किनारों से दूर है सीपियों के पास रहता है वक्त के घोंघें चुनता है... Read more
मिर्जा साहिबा
मोहब्बत की दुनिया में साहिबा का नाम विश्वास और धोखे के ताने बाने में उलझा सा प्रतीत हो... तब भी मिर्जा साहिबा का इश्क कहीं... Read more
सोचती हूँ.....
सोचती हूँ किसी दिन पी लूं तुम्हारे होठों की मय एक ही सांस में और कूद जाऊं तुम्हारी आँखों की पनीली झील में तुम पुकारो... Read more
सवाल तुमसे.....
कभी देखा है अग्निमुख नग के साये में बसे घरों की लुटी पिटी तहस नहस दुनिया... टुकड़ों में कटी दरारों में फटी खुले ज़ख्म सी... Read more