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सहजयोग, प्रचार, स्वांतःसुखाय लेखक, कवि एवं विश्लेषक.

Hometown: मुरादाबाद (उ प्र)
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All Postsकविता (13)गज़ल/गीतिका (9)मुक्तक (2)गीत (4)
प्रीत के ही गीत गाना चाहता हूँ
प्रीत के ही गीत गाना चाहता हूँ प्यार मै सबको सिखाना चाहता हूँ मैं विरह के गीत गाकर क्या करूँगा वेदना में मुस्कुराना चाहता हूँ... Read more
दर्द में भी मुस्कुराना चाहिए
एक नुस्खा आजमाना चाहिए दर्द में भी मुस्कुराना चाहिए दोस्ती सच्ची किसी से है अगर गर्दिशों में काम आना चाहिए छोड़ बातें मजहबी उन्माद की... Read more
जन्मभूमि पर रामलला के मंदिर का निर्माण हो
पूरी हो मन की अभिलाषा जन जन का कल्याण हो जन्मभूमि पर रामलला के मंदिर का निर्माण हो आक्रंता था बाबर जिसने जन्मभूमि कब्जाई थी... Read more
द्रौपदी ही अब हरेगी द्रौपदी के उर की पीड़ा
रोज होते हैं स्वयंवर, रोज होती द्यूत क्रीड़ा है नहीं कोई हरे जो, द्रौपदी के उर की पीड़ा दांव पर लगती है प्रतिदिन द्रौपदी क्षण... Read more