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मोहब्बत की मज़बूरियाँ
पास रहके भी,कितनी दूरियाँँ हैं। ये कैसी सनम,मज़बूरियाँ हैं।। हम दीदार में,दीवाने हुए प्यार में। चुन लिया चाँद,सितारों के हार में। चाँदनी मिली है,चाँद से... Read more
साथ नहीं भूले
भूले हैं हर बात,तुम्हारा साथ नहीं भूले। यार हमें है याद,हम मुलाक़ात नहीं भूले।। हँसके बातें करना,मिलके मुस्क़ुराना। चुपके दबे पाँव आ,आँखें मेरी छिपाना। उन... Read more
क़सम से प्यारी री
सुन प्रीतम की बात..... *********************************** तू लगी प्यारी मुझको,तेरा रूप अनुपम। फूलों ने महका दिया,ज्यों दिले-चमन सुगम।। ज्यों दिले-चमन सुगम,फ़लसफा न तोड़ता रे। प्यार का... Read more
प्रेम की सुगंध
कविता.... प्रेम की सुगंध.... ******************************* प्रेम सर्वोपरि है,दिल से किया कर यारा। प्रेम के मोती हैं,समंदर के दिल की धारा। पर्वत सम बन ज़रा,अडिग होय... Read more
ये मेरा मन
कविता.....रोला छंद में .............कविता..."ये मेरा मन"... सावन सरीखा मन,प्यार बरसाए जाए। धरती यौवन पर,घना है ये ललचाए। बूँद-बूँद मद भरे,हिय मस्ती ले समाए। पागल हो... Read more
रोला छंद.....
रोला छंद ****************************** कभी किसी का हृदय,मत दुखाना सुन यारा। तू ख़ुदा से कम ना,सभी का होगा प्यारा। फूल-सी ख़ुशबू दे,जग से बनेगा न्यारा। मेरा... Read more
कुंडलिया छंद.....सोच-क़िताबें- प्यार.....
"सोच" ****************************** सोच अच्छी रखना तुम,जीवन सुंदर बने। सूरत सीरत नेक हो,प्यार समंदर बने।। प्यार समंदर बने,सब हँस गले मिलें सदा। तारीफ़ कर न थकें,रिश्तें... Read more
सुन प्रीतम की बात....याद रखें सभी
सुन प्रीतम की बात..कुंडलिया छंद ????????????? सभी के लिए ही गलत,धारणा लिए फिरें। काँटें हैं वो लोग रे,फूल कों चोट करें।। फूल को चोट करें,काहें... Read more
बेवफ़ा यार...
बेवफ़ा यार.... ************ निग़ाहें मिलाकर निग़ाहों से दूर कर दिया। पल में प्यार का शीशमहल चकनाचूर कर दिया। जो कहते थे साथी हैं हम सुख-दु:ख... Read more
??>अभिलाषा
जिसे चाहा वो न मिला,रह गई अभिलाषा। प्यार में सब कुछ मिले,ये नहीं परिभाषा।। राधा ने शाम को चाहा,जान से भी ज़्यादा। शाम मिला भी... Read more
प्यार निखारता...छंद कुंडलिया
कुंडलिया प्यार त्याग विश्वास है,दिलों का बंधन है। दूर रहकर भी तड़फ़े,हृदय संवेदन है।। हृदय संवेदन है,प्यार सर्वोपरि जग में। स्वर्ग महसूस करे,पा इसे यारा... Read more
दावत है....
सीरत पाई यार,तूने ग़ज़ब गुलाब की। सूरत में झलक है,भौर के आफ़ताब की। मस्वरा देते गर, मानो "प्रीतम" आब की। दावत है रात को,इन आँखों... Read more
सुख समृद्धि आए
सुख शांति मिलते जहाँ,वहीं स्वर्ग है यार। तनावग्रस्त जीवन तो,प्रथम नरक का द्वार।। प्रथम नरक का द्वार,प्रेम भरे गीत गाओ । हाथ से हाथ यार,रे... Read more
कविता... दोस्ती
दोस्त तेरी क़सम है,कृष्ण-सुदामा से न यह कम है। बिन कहे दर्द समझुँ न,मैं भी गुम यार दोस्ती गुम है।। नैनों में मेरे तू,हँसे है... Read more
5..सुन प्रीतम की बात...कुंडलिया
सुन प्रीतम की बात..कुंडलिया छंद **************************** हनीप्रीत की यारियां,बाबा का लोक रे। डूबा आनंद भैया,जेल बना शोक रे।। जेल बना शोक रे,दीजिए रे सफ़ाइयाँ। कौन... Read more
4..सुन प्रीतम की बात...कुंडलिया छंद
सुन प्रीतम की बात..कुंडलिया छंद ++++++++++++++++++++++++++ प्रथम छंद फूटा बंधु,कवि वाल्मीकि मुख से। क्रोच जोडा लख घायल,चिंतित हुए सुख से। चिंतित हुए सुख से,रामायण रच... Read more
2.......कुंडलिया छंद.......?
1..कुंडलिया ***************************** नववर्ष मुबारक होय,फूलो-फलो मित्रों। फूलों से महको सभी,खुश रहो तुम मित्रों।। खुश रहो तुम मित्रों,जीवन सफल हो भैया। प्यार की बनी रहे,सभी पर... Read more
??दुख की माँ सिर धुनेगी??
सुन प्रीतम की बात..कुंडलिया छंद *************************** 1..कुंडलिया *************************** हँस फूलों की तरह तू,खिल चाँद-सा भैया। पार हो जाएगी रे, भव-सागर से नैया।। भव-सागर से नैया,ज़िन्दगी... Read more
प्रीतम की कुंडलिया..2
सुन प्रीतम की बात..कुंडलिया छंद *********************** 1..कुंडलिया *********************** दशहरा यूँ मनाइए,मन का रावण ढ़ले। प्रेम के हवन-यज्ञ में,बुराई पूर्ण जले।। बुराई पूर्ण जले,पावन हृदय हो... Read more
प्रीतम की कुंडलिया
सुन प्रीतम की बात..कुंडलिया छंद **************************** 1..कुंडलिया **************************** कल किसी के हाथ नहीं,बडे बोल न बोलो। सबका आदर करो तुम,अहं सहित न डोलो।। अहं सहित... Read more
??छप्पय छंद??
विधा- छप्पय छंद...प्रीतम कृत ************************ होठों पर मुस्कान,दिल में लेकर अरमान। मंजिल मिलेगी रे,चलोगे यार तुम ठान। हौंसलों की सदैव,होती है जीत सुनिए। जिसने चाहा... Read more
??नशीब अपना-अपना??
देखा हमने आज़माके नशीब को। मिला वही जो मंज़ूर था साहिब को।। 1.?? चाहा जिसे वो मिला नहीं कभी। मिला वो जिसे चाहा नहीं कभी।... Read more
मानव जाति विनाश की ओर.....
सुविधाभोगी मानव सुविधाओं के,ज़ोश में होश गवाए जा रहा। प्रकृति-संतुलन बिगाड़े मूर्ख देखो,अपने पाँव कुल्हाड़ी खा रहा। पेड़ काटता अंधाधुंध नितप्रति,क़ारखाने से धुआँ फ़ैला रहा।... Read more
??कैसे दूँ इल्ज़ाम भला??
मुझे लिखने का शौक नहीं,लिखता हूँ वक़्त बिताने को। कवि कहने का बहाना हुआ,सुनिए मीत इस ज़माने को।। आशिक करते हैं शायरी,कहते हैं ये दुनिया... Read more
कुंडलिया... प्रीतम कृत
**************************** कुंडलिया-1 **************************** मित्रता कृष्ण-सुदामा-सी,मन-भेद पता चले। भू-नभ का अंतर होय,हँस लगा गले मिले।। हँस लगा गले मिले,दोस्ती कुबेर-खजाना। जिसको ये मिला है,मिला प्रभु का... Read more