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मैं, आचार्य शीलक राम, । मेरी अब तक धर्म, दर्शन, संस्कृति, योग, लोकसाहित्य, काव्य संग्रह आदि पर पैंतीस से ज्यादा किताबें छप चुकी हैं । इसके अलावा मैं ग्यारह International Research Journals का संपादक भी हूं। वर्तमान में दर्शन विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र (हरियाणा) में तैनात हूँ। संपर्क -9813013065, 8901013065
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All Postsकविता (3)लेख (1)दोहे (1)
भारत की सिंहगर्जना
इस युग के प्रसिद्ध रहस्यदर्शी, योगी, दार्शनिक एवं चिन्तक ओशो रजनीश ने बेबाकी से यह घोषणा की है कि सभी आत्त्मकथाएं अहंकार की घोषनाएं हैं।... Read more
चिन्तन
चिन्तन करो अवश्य, चिन्तन सन्तुष्टि होय ।। चिन्तन से पथ प्रशस्त हो, सुख की निद्रा सोय ।। चिन्तन जरूरी जीवन में, चिन्तन समस्या समाधान ।।... Read more