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==* मेरी आरजू *==
स्वच्छंद फिजाओं में खिलखिलाती हंसी हो मानलो जिंदगी चाँद तारों में जा बसी हो दरबदर भटकती कहानियाँ अब कहा रही हो नया सवेरा, नई उड़ान... Read more
क़त्लेआम ~~~~
(संदर्भ - गोरखपुर के अस्पताल की घटना) दद्दा मेरा लाल मर गया ये कैसा बाजार भर गया तेरे दर पर आई थी मैं सुनी मेरी... Read more
==* अच्छा लग रहा है *==
अच्छा लग रहा है खुलकर मुस्कुराना अच्छा लग रहा है खुलकर गुनगुनाना ना कोई बंधन ना किसीका चिल्लाना अच्छा लग रहा है खुलकर मुस्कुराना कब... Read more
हर दफ़े तु...........
हर दफ़े तु मेरी निगाहों में शामिल होती है ! ये जो चाहते है मेरी तुमसे हासिल होती हैं!! अक्सर ढूंढता हूं मैं तुम्हे फिजाओ... Read more