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साहित्य एवं संगीत में रूचि की वजह से आपके बीच हूँ .rnजब लिखना ज़रूरी हो जाता है 'तब लिखकर उलझने कम कर लेता हूँ rnदर्द की लोग दाद दिया करते हैं rn=====बंटी सिंह ===========

All Postsकविता (1)गज़ल/गीतिका (15)शेर (6)
शेर
bunty singh शेर Apr 27, 2017
बद्दुवा मुझे दो शर्माना नहीं दिली बात अब तुम छुपाना नहीं ब मजबूरियों पर हँसाना नहीं कभी था मैं अपना बेगाना नहीं -*-*-*-*--*-*-*-*-*-*-*-* bunty singh
शेर
bunty singh शेर Apr 27, 2017
मिलो न मिलो तुम जताना नहीं किया प्यार हमने दिखाना नहीं मेरी बात रखना गुमाना नहीं तुम्हारी अलग है सुनाना नहीं 0**00*0*00*0*0*0*0*-*-*-*-* bunty singh
शेर
bunty singh शेर Apr 27, 2017
यहीं दोजख ज़न्नत है जाना नहीं किया जो करम तुम भुलाना नहीं कहाँ जा मरूंगा ठिकाना नहीं जिल्लतें जियादा कमाना नहीं -*-*-*-*--*-*-*-*--*-*-*-*- bunty singh
शेर
bunty singh शेर Apr 27, 2017
कभी आप खुद से सताना नहीं दुखी हो गये तो फ़साना नहीं मेरी याद दिल से मिटाना नहीं तुम्हारी हस्ती हूँ दिवाना नहीं -/-/--//bunty singh-/-/-
शेर
bunty singh शेर Nov 24, 2016
''शहर में हर शख्स तनहा अनमना बहरा मिला कोठियाँ सब की अलग सब का जुदा कमरा मिला' . . . . . ;;रौनकें ही रौनकें... Read more
शेर
bunty singh शेर Nov 24, 2016
"हम दिल को कई रोज़ से बहलाये हुए हैं काग़ज़ के कबाड़ों से घबराये हुए हैं'' . . . ''रौशन रहते थे अपने परिचित बन्दे... Read more
ग़ज़ल ..'''.....अक़्स बूंदों में दिखाते हैं..''
================================ गुज़रते पल गुज़रते छिन कभी हमको रुलाते हैं कभी देकर सदायें वे हमें वापस बुलाते हैं दिलों को जोड़ने वाली उन्ही टूटी दीवारों से... Read more
ग़ज़ल ..''ज़िंदगी तुझे गुरूर क्यों है..''
************************************ ज़िंदगी तुझे गुरूर क्यों है ये शराब सा शुरुर क्यों है पल पल टूटा बिखरा बिखरा वक़्त सितमगर मगरूर क्यों है हाँ... डरा हुआ... Read more
ग़ज़ल ''........पुरानी दास्ताँ जो दरमियाँ..''
------------------------------------------ ग़लतफ़हमी हार जायेगी मियाँ दोस्ती जीतेगी सारी बाजियाँ। उन तलक फिर भी गयी न बात वो थी पुरानी दास्ताँ जो दरमियाँ मिल गया होता... Read more