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बलिदान
धुंधली सी आंखें मुरझाया सा चेहरा फटे कपड़े, टूटा चश्मा बदन इकहारा मुँह के अन्दर घुटी हुई सी सिसकी शायद दिल में कोई ज़ख्म है... Read more
सकारात्मकता
ना उम्मीदी के गहरे दरिया से निकालना है बहुत आसान सकारात्मकता का तेल डालकर विचार करो और प्रकाशवान ये सारी परिस्थितिया तुम्हारी सोच का ही... Read more
पिता
********पिता ******** वह फुलवारी का नायक, अडिग खड़ा उपवन में जो मुख, सूर्य सा तेज लिए, बगिया का पालक है वो जिसके मुख पर समय... Read more
आतंकवादियों की देश के अंदर से सहायता वाले आस्तीन के सापों के लिए एक रचना
देखकर हमारी शहादत जिसको खुशी मिलती है है अपना मगर शक्ल पड़ोसी से उसकी मिलती है ऐसा भी नही की मालूम न हो ठिकाना उसका... Read more