Skip to content

धीरे - धीरे बढ़ते कदम।
नया सवेरा करने रौशन।।

दो कदम तुम भी चलो,
दो कदम हम भी बढ़ें,
करने को शब्द गुंजन।

कुछ हाँथ तुम भी बढ़ाओ,
कुछ हाँथ हमारे भी बढ़ें,
करने साहित्य में हवन।

सुगमित अमिय हुआ सवेरा ,
छटेगा तम जो था घनेरा,
अब बनेगा उत्कृष्ट चमन।

सबका साथ सबका विकास,
दृढ़ निश्चयी होवे विश्वास,
महके ये सारा उपवन।

धीरे - धीरे बढ़ते कदम।
नया सवेरा करने रौशन।।

सौम्या मिश्रा अनुश्री

All Postsकविता (5)हाइकु (1)
महात्मा सूरदास
हैं ये साहित्य के महाकवि भक्ति काल कृष्ण भक्त सूर। भक्तिमय काव्य सुगन्ध शोभित सोम सुरा मिलता भरपूर।।। मिले वृजभाषा की श्रेष्ठता मिलता रस छन्दों... Read more