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मेरा नाम सर्वोत्तम दत्त पुरोहित है
मैं राजस्थान के जोधपुर शहर का बाशिंदा हूँ , और न्याय विभाग में कार्यरत मैंने अपनी लेखनी को दिशाहीन चलाया उसके बाद मुझे एक गुरु मिले जिनसे मैंने ग़ज़ल लेखन की बारीकियां सीखी उन गुरुदेव प्यासा अंजुम साहब का मैं ऋणी हूँ और मैं जल्द अपनी ग़ज़ल की किताब जज़्बाती नामा पब्लिश करने वाला हूँ आज तक मैंने तकरीबन 500 ग़ज़ल लिखी है धीरे धीरे वो ग़ज़ल मैं यहाँ अपलोड करूँगा
सादर आभार

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दिखाई देने वाला ख़्वाब हर क़ामिल नहीं होता ज़ुबाँ से जो निकल जाए वो दर्देदिल नहीं होता शमा रौशन हुई तो ख़ाक परवाना भी होता... Read more
अब गुमाँ तुझको कैसे आया है
अब गुमाँ तुझको कैसे आया हैं क्यूँ मुहब्बत से दिल सजाया हैं नफ़रती बस्तियों में उसने' कहीं आशियाँ फिर से' इक बसाया है क्यों नक़ाबों... Read more