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Poet, story,novel and drama writer
Editor-in-Chief, 'Mahila Vidhi Bharati' a bilingual (Hindi -English)quarterly law journal

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All Postsकविता (28)गज़ल/गीतिका (1)गीत (4)
बाल कविता
Santosh Khanna गीत Oct 12, 2017
बाल कविता बच्चों को दिवाली उपहार देखो खेले मेरी मुनिया भांति भांति के सुंदर खेल। कभी उछाले गेंद हवा में कभी पलंग के नीचे डाले... Read more
पुकार
पुकार मैंने तब पुकारा था तुम्हें कि कब आओ गे कृष्ण नहीं जानती थी तुम नहीं आ सकते थे क्योकि पुजारियों ने तुम्हे बन्द कर... Read more
पुकार
पुकार मैंने तब पुकारा था तुम्हें कि कब आओ गे कृष्ण नहीं जानती थी तुम नहीं आ सकते थे क्योकि पुजारियों ने तुम्हे बन्द कर... Read more
नमन
Santosh Khanna गीत Sep 21, 2017
भारत देश को मेरा नमन सदा प्रेम का पाठ पढ़ाता युद्ध इसे कभी नहीं भाता संस्कृति विहग है यह अपना देश देश संस्कार जगाता जैसे... Read more
हिंदी
हिंदी हिंदी भारत माँ की बोली माँ के दूध -सी मिश्री घोली उसके सब हैं,वह है सबकी जैसे रिश्ता दामन-चोली हिंदी है हर मुख की... Read more
बाल कविता
पढ़ना चाहें गे एक बाल कविता। थोड़े समय के लिए बन जाये बच्चे। पंछियों को देख उड़ता मै भी अब उड़ना चाहूं पूछ रही हूं... Read more
अहसास
अहसास कितने ही बीत गए वर्ष हर्ष में भी, विषाद में भी जिन्दा हूँ क्यों,में मर नहीं सकी अब तो हो गई है आदत सहज... Read more
आज की स्त्री
आज की स्त्री आंखों में विश्वास भावों में संवेदना विचारों में प्रकाश फैसलों का बोझ उठाती वह करती है सड़क पार कभी नहीं लगा उसे... Read more
युद्ध और शान्ति
नहीं देखता भारत स्वपन कभी विश्व विजय के नहीं किये युद्ध किसी देश से उसे गुलाम बनाने के लिये या उस पर अधिकार जमाने के... Read more
पुकार
पुकार मैंने तब पुकारा था तुम्हें कि कब आओ गे कृष्ण नहीं जानती थी तुम नहीं आ सकते थे क्योकि पुजारियों ने तुम्हे बन्द कर... Read more
सच
सच यह सच है पत्थर की लकीर-सा जब मिलती हैं सहस्र भुजाएँ लहलहाने लगते हैं खेत भर जाते अन्न के भंडार नहीं रहता कोई भूखा... Read more
खुशी
बहुत दिनों के बाद आज खालिस खुशी ने डाला फेरा जैसे उषा का आंचल हो गया सुनेहरा पर्वत से छलकती आती जैसे नदिया की धार... Read more
चाह
चाह मेरे ह्रदय का हिमालय बार बार उठ खड़ा होता है वह फैल जाना चाहता है निरन्तर विस्तार पाते गगन की तरह वह मिलना चाहता... Read more
सभ्यता
नहीं बनाई जा सकती कोई भी सभ्यता ईंट और गारे से लौहे और औजारोंं से बनती है सभ्यता जन जन के कर्म से साफ सोच... Read more
सभ्यता
नहीं बनाई जा सकती कोई भी सभ्यता ईंट और गारे से लौहे और औजारोंं से बनती है सभ्यता जन जन के कर्म से साफ सोच... Read more
कहर
बार बार रहा कांप धरा का धरातल मच रहा है तांडव तनाव व् विनाश का चाँद-सितारों पर विजय रथ दौड़ाने वाला जल-थल-हवा में विजय-दुदंभि बजाने... Read more
हिंदी
सभी को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं हिंदी हिंदी भारत माँ की बोली माँ के दूध -सी मिश्री घोली उसके सब हैं,वह है सबकी जैसे रिश्ता... Read more
खबर।
खबर बहुत पहले की प्रकाशित मेरी एक रचना । तडफती धूप में खाली खेतों की फट्टी बिवाईयां पर खडा है वह आकाश पर नजर गड़ाये... Read more
पेड़
मेरा पेड़ तपती दुपहरी में जलाता है सूर्य जब हर इमारत, हर सड़क तब भी खड़ा रहता अटल मेरा पेड़ अचल एक ठांव हर राहगीर,... Read more
शब्द
शब्द जब मैं शब्दों के बीच होती हूँ अकेली नहीं होती साथ चलता है समय आकाश के संग धरती इन्द्र धनुषी हो जाती है शब्द... Read more
बदलाव
पुरुष वर्चंस्व का विरोध करती फिर भी पुरुष के लिये सजती नहीं बिठा पायी तालमेल नारी कथनी करनी में अंतर करती अच्छा हो छोड़े वह... Read more
पहचान
Santosh Khanna गीत Feb 14, 2017
अपने से पहचान कर लो । अपने से पहचान कर लो क्या किया जीवन में अब तक दो गे धोखा खुद को कब तक चल... Read more
चिड़िया
चिडिया उड़ती चिडिया गाती चिडिया मन को बहुत लुभाती चिडिया सुबह सवेरे घर की छत पर गीत सुनाने आती चिडिया पेड़ पेड़ पर डाल डाल... Read more
गज़ल
कौन है जो बादलों की ओट से मुस्काता रहा कर के ईशारे रोशनी के पास बुलाता रहा आखों पर परदे थे पहचान नहीं पाये हम... Read more
आईना
आईना कहीं नहीं हूँ मैं अपनी कविता में नहीं है मेरा कोई सपना या फिर कोई अपना हैं तो बस आंसू या फिर आहें या... Read more
अहं
अहं जब जब सोचा पा ली है विजय मैंने अपने अहं पर पता नहीं क्यों जरा- सी-ठोकर लगने पर फिर किसी गहराई से फुफकार उठता... Read more
बेटियां
जब से बता दिया है उसे नही है भेद लड़का हो या लड़की वह चहकने लगी है स्कूल मे , कालेज में सेना में, कार्यलय... Read more