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मेरा नाम मुहम्मद आरिफ़ ख़ां हैं मैं जिला बुलन्दशहर के ग्राम चन्दियाना का रहने वाला हूं जाॅब के सिलसिले में भटकता हुआ हापुड आ गया और यहीं का होकर रह गया! सही सही याद नहीं पर 18/20की आयु से शायरी कर रहा हूँ ! उस्ताद तालिब मुशीरी साहब का शाग्रिद हूँ पर ज्यादा तर मैने फेस बुक से सीखा जिसमें मनोज बेताब साहब, कुंवर कुसुमेश साहब, मुख्तार तिलहरी साहब का बहुत बडा हाथ है !

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ज़़बांं जो शाायराानाा जाानताा हैै
परिन्दा ..आशियाना जानता है फ़क़्त अपना ठिकाना जानता है अलम बरदार है तहज़ीब नौ का ज़बां जो शायराना ..जानता है उसी को प्यार मिलता है... Read more
ग़मों की दुनिया तलाश लोगे बुरा करोगेे
ग़मों की दुनिया तलाश लोगो बुरा करोगे अलेहदा सबसे रहा.. करोगे बुरा करोगे बुरा करोगे जो चुप रहोगे दुखों पे अपने किसी से मेरे सिवा... Read more