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विधा-चूरनवाला
बाल कविता_*चूरनवाला* देखो चूरनवाला चूरन लाया । संग में रंगबिरंगी गोलियाँ लाया।। कुछ खट्टी मीठी और तीखी लाया। फिर ऊँचे स्वर में आवाज लगाया।। मोटा... Read more
विधा दीपावली
**दीपावली **दीपों का त्यौहार घर को करें रोशनी से जगमग अमावसी रात उजाला चहुँ ओर-- धनतेरस धनलक्ष्मी बौछार। नरकासुरवध नरकनिकार। शाम नाली दीपक जलाएँ, अमवस्या... Read more
विधा तारीख
एक *तारीख* वो थी। पापा रिश्वतखोर थे।। मम्मी परेशान थी। सब मचाये शोर थे।। बंधी हथकड़ी देखे वो थी। थानेदार पकड़े पतिचोर थे।। बच्चें माँगे... Read more
विधा करवाचौथ
करवाचौथ की हार्दिक शुभकामनाएं करवाचौथ तो एक बहाना है। जीवनसाथी साथ निभाना है।। चूड़ियाँ खनकना तूझे बुलाना है। पायलिया रुनझुन तुझे हँसाना है।। चंदा सी... Read more
विधा शरदपूर्णिमा
शरदपूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं -- कान्हा रासरसाइया पूनों रात। मुरली बजाइया गोपी दौड़ि आत। सारी रात बाँसुरी धुन मा लीन रही, सुबह भई जो जहाँ... Read more
विधा   बुढ़ापा
बुढ़ापा जापान में माता पिता का बुढ़ापा। अकेले मे रोबोट से खेलता बुढापा।। अपनत्व का एहसास दिलाता बुढ़ापा। जवानी से बढ़ापे की ओर जाता बुढ़ापा।।... Read more
विधा  बरसाती रोग
बरसात का देखिए कमाल। कहीं सूखा है कहीं बाढ़। तबाही चारों ओर है मची बरसाती रोंगों की भरमार।।. डाक्टर के नखरे हजार। रोगी है रोग... Read more
विधा मित्रता
मित्रता पे संदेह किया सुदामा ने। द्वारिका नंगे पाँव आये थे। दीनता फिर भी न गयी अंतर्यामी से चने छुपाये थे।।. पड़े पाँव में छाले... Read more
विधा बाल लीला श्रीकृष्ण
जयश्रीकृष्ण कन्हाईया तूझको पुकारे यशोदा मैया वेणीबनावे मनहिं हर्षावे माटीखाये देखे तौ भूमण्डलदिखावे देखि मैया धरा गिरती उठे सबहिं देयि भुलाये गले लगाये मनहिं भरमाये... Read more
भजन -जयश्रीकृष्ण
हे कृष्णमुरारी ,हे गिरिधरधारी । हे मुरलीधारी ,मकृराकृतकुण्डलधारी । कंठवैजंतीधारी , शीशमोरमुकुटधारी। हे कान्हा ! तू दधिमुखलिपटाये । तू गोपिनका भरमाये। तू राधासंगिरासरचाये । तेरी... Read more
मुक्तक -जयश्रीकृष्ण
तेरी छोटी पयियाँ तेरी चूमती हथियाँ तू धरती चूमें तेरी पकड़ती बयियाँ तेरी छोटी मोती दतियाँ तेरी बजती पयजनियाँ तू कठुला मुखडाले तेरी साँवरी सुरतिया... Read more
कविता --विरहणी
विरहणी ऐ पवन ! जरा रुकजा मेरे संगसंग चल। राहें भूली मैं प्रियतम राह दिखाते चल। राह पथिक बनके जरा धीरे --धीर चल। मै आई... Read more
विधा कविता
विरहणी ऐ पवन ! जरा रुकजा मेरे संगसंग चल। राहें भूली मैं प्रियतम राह दिखाते चल। राह पथिक बनके जरा धीरे --धीर चल। मै आई... Read more
वंदे मातरम
माँ युद्धभूभि में घूमती। राक्षसों सें कभी नहीं डरती । गरजतेहुये सिंहों से कभी डरो नहीं, वीरों शक्ति से सामना करो।।. कभी कायरता अपनाओं नही।... Read more
अंधविश्वास
सपेरे साँपो को पालते है । बिषैले दाँतो को जो तोड़ते है। आतंकी अपनो में है खुला घुमता, निरापराधी प्राणी को जो जकड़ते है.।।. बीनकी... Read more
मुक्तक - सावन कजरी
आईं सखियाँ गाये कजरी। बिजुरिया मोती सी चमकी। पिया ठाड़े दूरहि मुस्काये, भीजी चुनरिया तनहिं लिपटी।।. ****** मेंहदी रची सखी हँसती। देखि पिया महकी कहती।... Read more
मुक्तक --सुनहरा सपना
धरा से आतंकियो को मिटा दो। अहिंसा की ज्योति को जगा दो। तीर्थयात्री जयकारा लगाते चलें, त्रिलोकनगरी फूलों से खिला दो। ************ सुगंधितकेशरक्यारियों को महका... Read more
मुक्तक-- काश्मीर
धरा से आतंकियो को मिटा दो। अहिंसा की ज्योति को जगा दो। तीर्थयात्री जयकारा लगाते चलें, त्रिलोकनगरी फूलों से खिला दो। सज्जो चतुर्वेदी******काश्मीर
किस रूप में
मानव माथे पड़ी लकीर कभी मिटती नहीं फकीर माँगे देने से अमीरी घटती नहीं। प्रभु न जाने किस भेष मे आ जाये द्वार, दर्शन पा... Read more