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समझौता
चलो कुछ समझौता कर ले वक्त न तुम्हारा न होगा हमारा कुछ आपस में बटवारा कर ले मैं तुम्हें याद रखूँगा तुम्ह मुझे न भुलाना... Read more
मुक्तक
बुढ़ापे में जो नज़र कमज़ोर हो गई अफ़सोष सब की नीगह पलट गई हर चीज़ पुछता हूं,उलझी सी नज़र उजली सहर जैसे अंधेरी रात हो... Read more
बसंत
बसंत खड़ा द्वार पल्लवित कुसुम,हरित कोमल पत्र सम्भार दिग सुशोभित,हर्षित-गर्वित धरा रूप अपार शीतलता ग्रसित,रंजीत रक्ताभ अधर- कपार स्वेत वैरागी परिधेय मुक्त आया रंगीन वाहर... Read more
बदलाव चाहिये
बदलाव चाहिये सुबह की चाय हाथ मे अखवार वही खबर लूटमार बलात्कार भ्रस्टाचार पढ़ते पढ़ते चाय ठंडाई छाई मलाई अंतरमन मे अफसोष करते सरकार को... Read more
मिलन
एहसास मिलन की खुमार, चड़े हुए नशे की सुमार नशे की सूरत उतरे, पर न उतरे मिलन का एहसास एतवार अभी बाकी, खूश्बु रह गई... Read more
आया रे सावन
आया रे सावन खिल उठा मन, चहका चित्तवन, झूमे आंगन आंगन , सखीयाँ नाचो-गाओं, धूम मचाओ,बड़ गई धड़कन बहका-बहका मोसम, भीगी भीगी हवा,आया रे सावन... Read more
मैं बूढ़ा पेढ़,
मैं बूढ़ा पेढ़, मुझ मे झुरियां पढ़ चुकी, कितने अर्सों से यहाँ खड़ा ! गर्मी-सर्दी,सावन -भादो- हर मौसम को निहारता, सारे के सारे उतार चड़ाव,... Read more
बीता- वक़्त
बीता- वक़्त सचमुच खोया वक़्त, सोये देर तक इधर उधर की बातें, गप्पे देर तक उम्र बढ़ गई, मायूसी दूर तक जागे अब,अफसोश कब तक... Read more
कल
गुजरे हुवे कल पूछे कुछ ऐसे कल अभी गुजरा कंहा से फिर वापस आने की है जो बात कल नहीं, आज भी हूँ साथ हर... Read more
मुक्तक
बहुत उदास हूं थोड़ा मन बहला दो ना बहुत ज़्यादा नहीं थोड़ा समझा दो ना थक कर सो जाऊं सपने में यों ही कहीं वह... Read more
स्वप्न बुनना
स्वप्न बुनना जब देखता हूँ ; बिछोने पर बैठी, हज़ारों फंदे डाल, बेटे के लिये,जाड़े मे, क्रोशिए से स्वेटर बुनते! सोचता हूँ ,बुनती ही क्यों?... Read more
ठन्ड में  पेश है चाय:-
ठन्ड में पेश है चाय:- प्यारा बंधन हम दोनों यारों में .........................जैसे गरम चाय स्पर्श भावों के रोमांच शरीर पे .......................जैसे वाष्पित चाय लिखे लेख... Read more
जिन्दगी
जिन्दगी जिन्दगी के दस्तूर बड़े निर्जीव हसंता-रोता खेलता मौत के ठिकाने पहुंचने सजीव कुछ दमकते ख़याल जिस का असर अज़ीब मन को रोशनी देते अँधेरे... Read more
अजन्ता के मूर्त-रूप
पाषाण शिला मे सजीव शिल्प अत्यन्त निराला; अजन्ता के मूर्त-रूप मे प्रकट नारी-सौन्दर्य कला, शिल्पी के अन्तर भाव छेनीसे निखर निखर चला, चाहत थी या... Read more
चंचलवाला
महके जो अंग अंग जुबां सरस मधुर रशीली नयनो में मादकता है गालों पर लाली नाक मुख सिकोरे चाल चले मतवाली पांव में पैजनीया कानों... Read more
चिट्ठी आई बेटे की
चिट्ठी आई बेटे की तुम्हारे जाने के बाद हर दिन खिड़की से बाहर तकाते उम्मीदों की आश लगाये मायूस होकर अब गुमशुम से खिड़की से... Read more
हालात
वक्त आया ऐसा न वफ़ादारी रहेगी एहसान की न कोई क़रजदारी रहेगी गज़ब चलन जमाने की देखेगा जमाना मतलबी यारों की दुनियादारी रहेगी काम निकल... Read more
नारी  विमर्श
चटक लाल रंग मांग में सिंदूर मंगलसूत्र, चुड़ियाँ माथे की बिंदीयाँ सुहागन की हर निशानी कितने प्रयत्न से धारन कर मैं, अभागन कहलाई सुहागन, परन्तु... Read more
मुक्तक
जब शहर की उदास सी चुप-चाप शाम देखता हूं गांव में चिड़ियों का चहकना खूब याद करता हूं अब उदास फिरता हूं इस शहरी पक्के... Read more
शाम की कहानी
रात दिन का जिक्र रहा, गुमनाम रह गई शाम आशिकों ने दामन थामा, लम्हों में बीत गई शाम सुरमई सी कल्पना रही , अंत-उदय में... Read more
तुम पराई
तुम पराई "हो-ली" प्रिये ! तुम तो पराई "हो-ली":- छिपुं विस्मृती के अंधकार में, उसके पहले हृदय पलट पे, मेरे प्रणय-पल के, प्रथम मिलन क्षण;... Read more
पाती प्रेम की
पाती प्रेम की शब्द शब्द है मुखर नेह अनुवादों की अक्षर अक्षर गमक रहा सुगंध देह की फ़ैली स्याही महकी जैसे यादों की मन में... Read more
तेरी याद मे,
तेरी याद मे, मुस्कुराते लबों से, नज़र के झरोखे से ; उँगलियों के बंधन से, बदन की खुशबू से, गलों की लाली से,आलिंगन की गर्माहट... Read more
कविता के आयाम
छंदों से कर दूं आँख मिचोली, या लिख दूं कोई सुरीली बोली ... शब्दों की लाली रच दूं, या भर दूं पेचीदा अक्षरों की झोली... Read more
कन्या की छबी न्यारी
शीतल वचन,कोमल मन,स्नेह सुख परिभाषी मंगल मूरत,नित सेवत,सत चित,प्रकृती से दासी निसदिन सेवत,प्रेम सहित डोलत,करत सुखराशी कबंहूँ नहीं मांगत,न कबंहूँ कठोर संकल्प फरमासी करुनामय,रसमय,लछमी रूपा... Read more
मिलन का आभास
पंख अगर होते मेरे पास रंगों में भर देता पलाश शब्दों में भर देता उल्लास नया पैगाम, नई अभिलाष पंख अगर होते मेरे पास दूरी... Read more
मिलन के पल
प्रिय ! तुम्हारे साथ के वह पल या तुम्हारे बिना यह पल दोनों पल, कैसे हैं ये पल ? जला रहे हैं मुझे पल पल... Read more
प्रियतमा की याद
प्रियतमा की याद गहरा रखता है अर्थ इस खोज का स्मृति से सूने वन मे रात्रि समय ध्वनि गूंज जाती जैसे डूबा हुआ उदासी मे,याद... Read more
वक्त
वक्त से सीखा की वक्त किसी के लिये रूकता नहीं वक्त ने ही जताया,वक्त सब का एक सा चलता नहीं बदलते वक्त के साथ जो... Read more
प्रात: अभिनन्दन ।
प्रात: अभिनन्दन । जागो, देखो भोर का उजियारा कोहरे से छाया जैसे अंधियारा लगे क्षितिज में मिल गई है धरा वसुधरा में ठन्ड का असर... Read more
भारत का एक गाँव ...
भारत का एक गाँव ... गाँव की सड़क-किनारे कढ़वे-मीठे अनुभवों के झरोखों से छिप बिस्मृती के अंधकार में यादो के झुरमुट से कोई पत्ता,उड़ते हुवे... Read more
शृंगारिका
शृंगारिका नैन चंचल मिलन विकल मन आकुल आतुर मित रूप शोभित मन विचलित तन पल्लवित शृंगार रचित प्रेयसी चित्त अधर लाल सुकोमल गाल मृग नयन... Read more
रोटी का सवाल ?
सड़क किनारे बैठी वह औरत अपने बच्चे को पिटाई करते करते खुद रो रही थी उसके साथ बच्चा रो रहा था भूख से बेहाल मां... Read more
मिलन के एहसास
एहसास मिलन की खुमार, चड़े हुए नशे की सुमार नशे की सूरत उतरे, पर न उतरे मिलन का एहसास एतवार अभी बाकी, खूश्बु रह गई... Read more
आया रे सावन
आया रे सावन खिल उठा मन, चहका चित्तवन, झूमे आंगन आंगन , सखीयाँ नाचो-गाओं, धूम मचाओ,बड़ गई धड़कन बहका-बहका मोसम, भीगी भीगी हवा,आया रे सावन... Read more
एहसास
सर्द हवाओं का यह मंज़र, लहू को जमाता मौसम का असर; नर्म हथेलियों पे शबनमी ओस, खुश्क पीले पत्तों की सर-सर; बर्फ़ बिखरते, बहता चुभन... Read more
मिलन के ख्याल
मिलन के ख्याल जब वह शर्मसार होते हैं; तो चहेरे पे गुलाब होते हैं . आँखों मे शोख़ी,होटों मे मुस्कान;दिल मे तूफ़ान होते हैं जब... Read more
मेरी कलम लिख रही, "विरह" मधुमास का, मन मुरझाया, खिला फूल जब अमलतास का, चली जब बसंती पवन,पलाशों सा मन दहका, गमगीन कोयल भी गाये... Read more
राजनैतिक फायदे
बेहद मजेदार है मजहबी ज़हर सिर्फ फैलाने पर दिखाता असर सियासतदान को दिलाता मंज़र बेगुनाहों पर होता बेवजह क़हर फैलानेवाले बने धर्म के सिकंदर बांट... Read more
मैं और तुम
मैं और तुम मैं प्यासा सागर तट का मैं दर्पण हूँ तेरी छाया का मैं ज्वाला हूँ तड़पन का मैं राही हूँ प्यार मे भटका... Read more
व्यंगयुक्त तुकबंधी
एक पुरानी व्यंगयुक्त तुकबंधी नाम की महिमा भजो प्रभु का नाम बने तेरे, बिगढ़ेे काम देख हाल प्रभु चकराये नाम की महिमा से शरमाये किस... Read more
शेर
Sajan Murarka शेर Jan 18, 2017
आज दिल की धड़कन सम्भलती नहीं मुझ से न जाने क्यों हिचकीयां आ रही मुझे सुबह से ******* पढ़ पसीने की बूंदें माथे पे उभर... Read more
शेर
Sajan Murarka शेर Jan 18, 2017
ए जिंदगी जीने के दिन चाहे जो कम रहे मगर जितना भी रहे,कोई शिकायत न रहे ******** वक़्त हम पर यह भी आना था बाक़ी... Read more