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मैं पश्चिमी चम्पारण से हूँ, ग्राम+पो.-मुसहरवा (बिहार) वर्तमान समय में दिल्ली में एक प्राईवेट सेक्टर में कार्यरत हूँ। लेखन कला मेरा जूनून है।

Hometown: नरकटियागंज (प.चम्पारण)
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कोई नहीं

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मास्टर जी
मास्टर जी................... ......... ........ मेरे मास्टर जी तब मुझे पढाते थे कभी कोई प्रश्नोत्तर तो कभी पुरा पाढ ही रटाते थे कहते थे स्वाध्याय जरूरी... Read more
प्रदूषित दिल्ली (भोजपुरी कविता)
प्रदूषित दिल्ली.... ................................... छोड़ के अईनी आपन गांव दिल्ली में मिलजाई छांव जीवन बनजाई खुशहाल रहे ईहै तब सोच हमार सोच पे हमरा फीरल पनी... Read more
चलो री सखी...
चलो री सखी.... ...................................... चलो री सखी मीलजुल छेड़े आज मीलजुल छेंड़े, मिलजुल छेड़े -2 मीलजुल छेड़े आज कृष्ण मुरारी नंद के लाला है रसिया... Read more
प्रदूषण
प्रदूषण... .............. विषाक्त हैं हवायें, फिजायें अभिषप्त हुई जीना मुहाल हर मानव संतप्त है। मैली हैं नदियाँ और सुख रहे पोखर जहरीला मौसम आज जीवन... Read more
मित्र
★★★मित्र★★★ .............. .............. मित्र तो बस मित्र है वह आम है ना खास है। मित्र से ही जीवन में खुशीयाँ तेरे पास है।। मित्र है... Read more
मित्रता
मित्र, दोस्त, यार ऐ ऐसे शब्द हैं जिनके श्रवण मात्र से जैसे फिजा में खुशबू बिखर जाती है।मित्रता विश्वास की वो चरम विन्दू जिसके उपरांत... Read more
महंगाई के मार
महंगाई के मार.......... (भोजपुरी कविता)......... ऐह दीवाली सगरे हमें अंहार दिखेला। महंगाई के मार महंग समान मिलेला।। सबका हमसे रहला हरदम बहुते आशा लाख जतन... Read more
पीर
हम कबसे खड़े थे सहारे की तलाश में, वो आज भी न आयीं पड़ोस की दुकान में। मैं देखता रहा दिन, दोपहर, रात और जीवन... Read more