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साहित्य मृगतृष्णा बन कर मन को दौड़ा रहा है। कई शेरों ने झपट्ट मारे, घायल किया, मरणासन्न हुआ, पर चौकड़ी नहीं छोड़ी।

अतः प्रस्तुत हूँ!

?☺?

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अदब
किसी' इस्कूल की बेजान सी' मजलिस जैसे!! अदब है शहरे ख़मोशां की परस्तिश जैसे!! तमाम चेहरों से मुस्कान ऐसे ग़ायब है, पढ़ा रहा हो छड़ीदार... Read more
गौरैया : नवगीत
नवगीत * जब उठ जाये दाना पानी! उस मुंडेर पर बैठे रहना, प्रिय गौरैया! है नादानी!! * जाने किसके मन में क्या है? जग की... Read more