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नाम - डॉ रीता
जन्मतिथि - 20 जुलाई
शिक्षा- पी एच डी (राजनीति विज्ञान)
आवासीय पता - एफ -11 , फेज़ - 6 , आया नगर , नई दिल्ली- 110047

आत्मकथ्य - इस भौतिकवादी युग में मानवीय मूल्यों को सनातन बनाए रखने की कल्पना ही कलम द्वारा कुछ शब्दों की रचना को प्रेरित करती है , वही शब्द रचना मेरी कविता है ।

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प्रकृति में सूर्य तत्व की महत्ता और पर्यावरण संरक्षण
Rita Singh लेख Jan 14, 2018
मकर संक्रांति पर विशेष - प्रकृति में सूर्य तत्व की महत्ता और पर्यावरण संरक्षण ----------------------------------------- सूर्य प्रकृति का केन्द्र है । उससे ही प्रकृति अपनी... Read more
शूल/काँटा
बने तुम भी पहचान चमन की चुभन नहीं शान हो गुलशन की । कोमल कितना साथ तुम्हारा तुम बिन अधूरी महक सुमन की । तुम... Read more
कुहासा
भानु तेरी रश्मि के सँग आँख मिचौली करे कुहासा नभ जल थल सब राहों में विलंब सदा करे कुहासा शीत काल में डेरा डाले है... Read more
है ख्वाहिश मेरी
तेरे संग वक्त बिताना है ख्वाहिश मेरी तुझे हर सुख दुख सुनाना है ख्वाहिश मेरी । तुझे ख़्वाबों में सताना है ख़्वाहिश मेरी । तुझे... Read more
झरने
कर संघर्ष पाषाणों से मधुर संगीत सुनाते झरने कल - कल कल - कल गीत सुनाते आगे बढ़ते जाते झरने । कभी न रुकते कभी... Read more
आओ धरा अपनी सजाएँ
वृक्ष लगाएँ और बढ़ाएँ आओ धरा अपनी सजाएँ । हरी चुनरिया इसे उढ़ाएँ हरा भरा श्रंगार कराएँ । आओ धरा अपनी सजाएँ । रोपित कर... Read more
मैया की ममता
Rita Singh गीत Apr 30, 2017
मैया तेरा नटखट लाला -- किशन द्वारिकाधीश बना कल तक जिसने मटकी फोडी आज वही जगदीश बना ।। कैसा माखन दिया , यशोदा! राजबुद्धि उसको... Read more
सूरज काका
सुबह सवेरे सूरज काका नित मुस्काते तुम आते हो अपनी सोने की किरणों को संग सदा ही ले आते हो । घड़ी भर भी विलंब... Read more
माला के जंगल:
कुछ तपस्वी से लगते हैं शांत भाव से तप करते हैं हरे भरे तरोताजा से प्रफुल्लित मन से खड़े हुए हैं । कुछ बुझे बुझे... Read more
नमामि गंगे
जय जय गंगे , जय जय गंगे । नमामि गंगे , नमामि गंगे ।। पाप नाशिनी , जग तारिणी सुख कारिणी , दुख हारिणी हर... Read more
आया फागुन मास
रसिया के रंग में जब खेले गोरी फाग । समझो ए संग सहेली आया फागुन मास । आया फागुन मास देख कलियाँ भी हर्षायीं ।... Read more
जीवन
जीवन सरस सलिल सा बहता जीवन अवरोधों संग बढ़ता जीवन निशा दिवस है गतिमय जीवन हँसते गाते चलता जीवन । दुख के पल भी सहता... Read more
नेह की पीड़ा
जब गमन तुम्हारा होना तय था क्यों गोपी में नेह जगाया था , कान्हा तुमने नेह की पीड़ा का , क्या मर्म कभी न पाया... Read more
कान्हा की वंशी
Rita Singh गीत Feb 5, 2017
वंशी तुम्हारी प्रिय कान्हा किस्मत कैसी लायी है , बनी काठ की होकर भी यह मन तुम्हारे भायी है । चाहा जैसा साथ तुम्हारा मुरली... Read more