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परिचय- आप एक लेखिका,कवयित्री एवं शिक्षिका हैं। पिछले लगभग ४४ वर्षों से आप मंच पर कवितापाठ करती आ रही हैं। आपके दो काव्य- संग्रह भी प्रकाशित हुए हैं। १. काव्य- किरण ( नव कवियों के लिए )२. काव्य- उमंग ( स्कूली बच्चों के लिए ) इसमें अनेक काव्य- विधाओं में, सरल भाषा में रचनाएँ लिखी गयीं हैं ।अक्सर प्रतिष्ठित संस्थाओं से सम्मान प्राप्ती एवं समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, संग्रहों में रचना प्रकाशन होता है

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All Postsकविता (2)गज़ल/गीतिका (1)मुक्तक (2)गीत (4)
मुक्तक
मुक्तक - कौन यह कहता है कि ख्वाब तो झूठे होते हैं । इनसे ही तो पथ, जीवन के अनूठे होते हैं । साकार हो... Read more
गीत
Ravi Sharma गीत Nov 12, 2016
पेड़ों की छाँव तले फूलों के पास बैठूँ तो मुझे लगे आप मेरे साथ । राहों में सपने पले धुँध आसपास देखूँ तो मुझे लगे... Read more
गीत
Ravi Sharma गीत Nov 12, 2016
मन की बोली मन की बोली जो कोई जाने, वो ही अपना कहलाता है। मन वो पंछी जो निश- दिन, हमको, ख़्वाब सुनहरे दिखलाता है।... Read more
गीत
Ravi Sharma गीत Nov 9, 2016
तौबा- तौबा करते- करते प्यार हो गया। आँखों ही आँखों में कब इक़रार हो गया। कुछ ना बोली, मुख ना खोली। जानूँ ना मैं, आँख-... Read more
गीतिका
बेख़ौफ़ दिल की धड़कन, बेख़ौफ़ लव हमारे । हम तुम पे मर मिटे हैं, खुश हैं सभी नज़ारे । कोई उन्हें बता दे, तिरछी नज़र... Read more
चतुष्पदी
बालों ने तेरे गालों को छुआ । काजल ने तेरी पलकों को छुआ । ये देख के कंगना खनक उठे, गीतों ने तेरे होठों को... Read more
मुक्तक
दर्द के फूल पिरो कर प्रीत डोर में । टाँक यादों के मोती ओर- छोर में । यूँ गुँथी पवित्र बंधन की माला, फैलाती सुगंध... Read more
कविता
यह कविता लगभग १९ वर्ष की आयु में, जुलाई १९७५ को ट्रैकिंग करते समय, लगभग १०- १२ मिंट के समय में लिखी गई। आज भी... Read more
गीत
Ravi Sharma गीत Nov 6, 2016
उलझ- उलझ कर सुलझ- सुलझ कर, फिर से उलझ जाती हूँ । तुम्हें जब उदास पाती हूँ । मचल- मचल कर, संभल- संभल कर, फिर... Read more