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यह वही नारी है
निडर और स्वावलंबी बनकर अपनी छवि निखारी है असहाय और अबला नहीं शक्तिपुंज वह नारी है अपनी शक्ति से वह अब तलक अनजान थी सब... Read more
मौसम की व्यथा
रे मौसम क्यों करते हो हम पर इतने सितम अभी चंद महीनों पहले ही तो तुम थे कितने गरम तुम्हारी प्रचंड अग्नि की वर्षा को... Read more
अनमोल जीवन
तोड़ कर गुलाब किसी के बाग़ का अपना गुलशन महकाया तो क्या किया बुझा कर चिराग किसी के घर का अपना महल जगमगाया तो क्या... Read more
मन के जीते जीत
मन में उत्साह हो कुछ करने की चाह हो कौन रोक सकता है चाहे काँटों भरी राह हो मन में उमंग हो उठती तरंग हो... Read more
बसेरा
मुझे यहाँ पर नौकरी ज्वाइन किये हुए अभी छ: महीने बीते थे,| मेरे ऑफिस में करीब १५-२० महिलाये काम करती थीं उनमें से एक थीं... Read more
जीवन दान
रोज की तरह मैं आज भी अपने क्लीनिक में समय पर पहुँच गयी थी | क्लीनिक के बाहर सुबह मेरे पहुँचने से पहले ही रोज... Read more
ट्रैफिक सेंस
मार्ग पर जब दो सवारों का संतुलन खो जाता है तभी एक गंभीर आकस्मिक दुर्घटना का जन्म हो जाता है असहनीय पीड़ा सहकर कभी कोई... Read more