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रामप्रसाद लिल्हारे "मीना "चिखला तहसील किरनापुर जिला बालाघाट म.प्र।
हास्य व्यंग्य कवि
पसंदीदा छंद -दोहा, कुण्डलियाँ
सभी प्रकार की कविता, शेर,
हास्य व्यंग्य लिखना पसंद
वर्तमान में शास उच्च माध्यमिक विद्यालय माटे किरनापुर में शिक्षक के पद पर कार्यरत।
शिक्षा एम. ए हिन्दी साहित्य नेट उत्तीर्ण हिन्दी साहित्य। डी. एड।
जन्म तिथि 21-04 -1985
मेरी दो कविता "आवाज़ "और "जनाबेआली "
पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई है।

All Postsकविता (17)गज़ल/गीतिका (5)मुक्तक (8)गीत (1)शेर (2)दोहे (3)कुण्डलिया (5)हाइकु (3)घनाक्षरी (2)
रामराज (कुण्डलिया) रावण का संहार कर, बुरे मिटा दो काम। रामराज कायम करो, बनकर के तुम राम। बनकर के तुम राम, गुरूर जरा तुम त्यागो।... Read more
सियासत सियासत का असर देखो खान पान भी बदनाम हो गये सब्जी सारी हिन्दू हो गई बकरे सारे मुसलमान हो गये। कहा तो गया था... Read more
मूफ़लिसी में भी रहबरी ढूंढते हैं। बैवकुफ़ हैं वो जो जिंदगी ढूंढते हैं। रहबसर चाहते हैं सभी उजालों में। कुछ एेसे हैं जो तीरगी ढूंढते... Read more
"हिन्दू मुस्लिम के चोंचले क्यूँ हैं " (मुक्तक) डगमगाये हमारे हौसलें क्यूँ है। उजड़े पंछियों के घोंसले क्यूँ हैं। हम तो सच के हिमायती हैं।... Read more
"सरेआम मोहब्बत हैं तुझसे मुझे " (मुक्तक) बाखुदा मोहब्बत हैं तुझसे मुझे। बेपनाँ मोहब्बत हैं तुझसे मुझे। मोहब्बत को मेरी यूँ मापा न कर। बेइंतहा... Read more
"मैं शिक्षक हूँ"(गज़ल/गीतिका) शिक्षक हूँ मैं मैं शिक्षा की अलख जगाता हूँ जीवन को जीने की मैं बुनियाद बनाता हूँ। बेमेल सुरों को सजा मैं... Read more