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अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक !
जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !!
रमेश शर्मा

Hometown: मुंबई
Published Books

दोहा दर्पण -साझा संकलन
दोहा संगम -साझा संकलन
प्रकाशन: रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित

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All Postsगज़ल/गीतिका (2)मुक्तक (19)शेर (2)दोहे (169)कुण्डलिया (4)
झूम रहा संसार
दिए सृष्टि ने अनगिनत,हमें खूब उपहार ! जिनको पा कर वाकई, झूम रहा संसार ! ! पनप रहा जब हर तरफ,,दहशत का व्यापार ! ऐसे... Read more
इनसे रहें सतर्क
सही गलत का आदमी,नही समझता फर्क ! बैरी कुंदन कामिनी, .. .. इनसे रहें सतर्क !! रूप रंग को देखकर,...नहीं बनाना मीत ! सोना हो... Read more
जीवित रहे समाज
वहाँ सफल होती नही, पूजा और नमाज! जहाँ बिना सदभाव के,जीवित रहे समाज! ढोंग और पाखण्ड का ,करिए प्रथम इलाज ! लाजिम है कहना तभी,... Read more
हैं नजदीक चुनाव
नेताओं का जिस तरह,बदला स्वत: स्वभाव ! शायद मेरे देश मे,........हैं नजदीक चुनाव ! ! राजनीति मे घुस गया, वंशवाद पुरजोर ! ले जाएगा देश... Read more
नाहक ही बेकार
ज्ञानी का लागे वृथा,.....लिया हुआ सब ज्ञान ! दिया नही यदि और को,उसमे से कुछ दान !! कह पाऊँ वो ही नही, .....कहनी है जो... Read more
लिखे लेखनी छंद
मातु शारदे को सुमिर , .....लिखे लेखनीं छंद ! भाव शब्द कुसुमित हुए , बिखरा मधु मकरंद ! लग जाए जज्बात का,अगर सुगंधित छौंक, पाठक... Read more
तब होगा उपचार
राजनीति से हो परे,....नेता करें विचार ! सही अर्थ मे देश का,तब होगा उपचार! ! करे प्रदूषण पर अमल,सही शीघ्र सरकार! दूषित नीर समीर का,... Read more
बिखरा मधु मकरंद
मातु शारदा रच रही, .....मेरे छंद तमाम ! मैं नीचे लिखता रहा, नाहक अपना नाम !! मातु शारदे को सुमिर , .....लिखे लेखनीं छंद !... Read more
पैरों तले जमीन
कालेधन के काज की, खुशियाँ हुई विलीन ! जी अस टी से हिल गई,...पैंरों तले जमीन! ! शासन ने जब नौकरी, ली निर्धन से छीन... Read more
किया न कन्यादान
रहे अधूरा ही पिता, .लेना इतना जान ! हाथों से अपने अगर,किया न कन्यादान! ! .................................... कन्याओं का भ्रूण में,... कर देते हैं अंत !... Read more
दोहे बाल दिवस पर
ऐसा कैसा बालपन,...कैसा यह व्यवहार ! बच्चों पर चलने लगी, बच्चों की तलवार ! ! उत्तरदायी कौन है,...इसका करो विचार ! दिल मे बच्चों के... Read more
रंग बिरंगे फूल
मुरझाये उनके सभी,... रंग बिरंगे फूल ! छोटी मोटी बात को, दिया जिन्होने तूल !! खिले कहां से सोच फिर, रंग बिरंगे फूल ! बोया... Read more
दोहे रमेश के
हुई सयानी बेटियाँ,..... नही रहा ये ध्यान ! पिता खिलौनो की अभी, ढूँढ रहा दूकान !! हो जाता है वाकई ,.....दोहे का तब खून !... Read more
जीवन के दिन रात
भाई मेरे बन गए, तब से अतिथि समान । जबसे उनके हो गए, अपने अलग मकान।। एक छोर पर ख्वाहिशें ,.. दूजे पर औकात! जिसमे... Read more
हिंदी दिवस पर
माह सितम्बर की हुई, है चौदह तारीख ! देंगे सारे आज फिर,हिंदी तुझको सीख! ! हिंदी मेरे देश की,..... मोहक मधुर जुबान ! इसका होना... Read more
श्राद्ध मे
जीते जी माँ बाप को,...नही पिलाया ऩीर! श्राद्ध पक्ष में मे शान से,उन्हे खिलाते खीर !! जिन्दा थे तब तो कभी, लिया न आशीर्वाद !... Read more
नसीब
सुनने में लगती हमें, सचमुच बात अजीब ! बने न जिसका काम वह, कोसे बैठ नसीब !! ........ गढ़ता है समभाव से , सारे कलश... Read more
बोलें तुच्छ जुबान
बेहूदा बातें करे,..... बोले तुच्छ जुबान ! अपने को पहचान ले, पहले वह इंसान !! कहने से पहले मनुज,...... अपने को पहचान ! तोल-मोलकर बात... Read more
झगडें का कारण
बढी गरीबी देश मे,....दो का दूना चार! कारण इसका मूल है,बढता भ्रस्टाचार !! नारी हो या हो रकम ,या हो मित्र जमीन ! झगडे का... Read more
बाढ का कहर
किया बाढ ने देश मे,.......ऐसा बंटाधार ! कितनो के टूटे हृदय,कितनो का घर बार !! कहे कहानी बेरहम, बर्बादी की बाढ़ ! आया है फिर... Read more