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Manager (IT), LIC of India, Divisional Office, D. D. Puram, Bareilly-243122, (U. P.)
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All Postsकविता (1)गज़ल/गीतिका (24)शेर (2)दोहे (1)
कम किसी से नहीं गुणवती बेटियां
हौसलों से भरी डोलती बेटियां हर कठिन लक्ष्य को भेदती बेटियां ———————————– पाँव रोको नहीं आज टोको नहीं पंख पाकर गगन चूमती बेटियां ———————————– सौम्य... Read more
कम किसी से नहीं गुणवती बेटियां
हौसलों से भरी डोलती बेटियां हर कठिन लक्ष्य को भेदती बेटियां ----------------------------------- पाँव रोको नहीं आज टोको नहीं पंख पाकर गगन चूमती बेटियां ----------------------------------- सौम्य... Read more
मैं  कब्र  में सुकून से  लेटा  न रह सका वोटों से मेरी लाश के सौदे की बात सुन
मैं कब्र में सुकून से लेटा न रह सका वोटों से मेरी लाश के सौदे की बात सुन ------------------------------------------------- राकेश दुबे "गुलशन" 19/11/2016 बरेली
बिछड़ी है आसमां से पलक पर झुकी है क्या आँखों   में   अश्कबार    घटा   ढूँढती है क्या
बिछड़ी है आसमां से पलक पर झुकी है क्या आँखों में अश्कबार घटा ढूँढती है क्या ----------------------------------------------------- ग़ज़ल क़ाफ़िया- ई (स्वर), रदीफ़- है क्या वज़्न-221... Read more
वफ़ा  करते  दिले- बीमारे- उल्फ़त से नज़र  भर  देखते  मुझको मुहब्बत से
वफ़ा करते दिले- बीमारे- उल्फ़त से नज़र भर देखते मुझको मुहब्बत से ---------------------------------------------- ग़ज़ल क़ाफ़िया- अत, रदीफ़- से वज़्न-1222 1222 1222 1222 अरक़ान- मुफ़ाईलुन ×... Read more
बरगला   ये   हवा  रही  है मुझे साथ  अपने  बहा  रही  है मुझे
बरगला ये हवा रही है मुझे साथ अपने बहा रही है मुझे ---------------------------------------------- ग़ज़ल क़ाफ़िया- आ, रदीफ़- रही है मुझे वज़्न-2122 1212 22/112 अरक़ान-फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन... Read more
लक्ष्य बड़ा है देश हित, धीरज रखिये आप। जरा  जरा सी बात पर, करिये नहीं विलाप।।
लक्ष्य बड़ा है देश हित, धीरज रखिये आप जरा जरा सी बात पर, करिये नहीं विलाप ---------------------------------------------- कहीं फाड़कर फेंकते, कहीं जलाकर नोट काले धन... Read more
ज़िंदगी की  धूप ने झुलसा दिया सारा बदन
ज़िंदगी की धूप ने झुलसा दिया सारा बदन जल रहा है आज बनकर एक अंगारा बदन ------------------------------------------------------------- ग़ज़ल क़ाफ़िया- आरा, रदीफ़- बदन वज्न- 2122 2122... Read more
नया साहिल बनाना चाहता है समंदर क्या जताना चाहता है
नया साहिल बनाना चाहता है समंदर क्या जताना चाहता है ----------------------------------------- ग़ज़ल क़ाफ़िया- आना, रदीफ़- चाहता है वज्न- 1222 1222 122 अरक़ान- मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन... Read more
ज़ख़्म आहिस्ता दुखाकर चल दिये
ज़ख़्म आहिस्ता दुखाकर चल दिये आप जो ये मुस्कुराकर चल दिये ----------------------------------------- ग़ज़ल, क़ाफ़िया-आकर, रदीफ़-चल दिये वज़्न- 2122 2122 212 (फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन) ----------------------------------------- ज़ख़्म... Read more
वफ़ा पर हमारी न उँगली उठाना
वफ़ा पर हमारी न उँगली उठाना कि रुसवा करेगा हमें कल ज़माना ---------------------------------------------- ग़ज़ल क़ाफ़िया- आना,रदीफ़-ग़ैर मुरद्दफ़ अरक़ान-फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन वज्न-122 122 122 122... Read more
इम्तिहाँ  मत  लीजिये  मेरी    वफ़ा का
इम्तिहाँ मत लीजिये मेरी वफ़ा का आपको कुछ डर नहीं है क्या ख़ुदा का ---------------------------------------------- ग़ज़ल क़ाफ़िया- आ, रदीफ़- का अरक़ान-फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन वज़्न-2122 2122... Read more
अँधेरी बस्तियों को रोशनी का सिलसिला देना
अँधेरी बस्तियों को रोशनी का सिलसिला देना उजालों की तमन्ना में हमारा दिल जला देना सजाये ख़्वाब है हमने लहू का रंग भर भर कर... Read more
कली बुझी बुझी हुई गुलों में ताज़गी नहीं
कली बुझी बुझी हुई गुलों में ताज़गी नहीं सभी बहुत उदास हैं नसीब में ख़ुशी नहीं बहार वादियों से छीन ले गई है ख़ुश्बुएं चमन... Read more
लिपटकर हम न साहिल  से कभी  रोये  यहाँ  यारो जिये   तूफ़ान  की  जद   में  हमें  आंधी ने पाला है
कहीं है चर्च गुरुद्वारा कहीं मस्जिद शिवाला है ख़ुदा को भी सभी ने कर यहाँ तक़सीम डाला है किसी ने आज देखा है मुझे तिरछी... Read more