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 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका।

उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न" सम्मान, "कोहिनूर "सम्मान, "मणि" सम्मान  "काव्य- कमल" सम्मान, "रसिक"सम्मान, "ज्ञान- चंद्रिका" सम्मान ,

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All Postsकविता (47)गज़ल/गीतिका (14)मुक्तक (22)गीत (13)लेख (12)दोहे (12)लघु कथा (1)कुण्डलिया (1)कहानी (2)हाइकु (7)
मुक्तक
छा गई पनघट उदासी गीत बिन सूना जहाँ। घाट आतप से तपे हैं प्रीत बिन सूना जहाँ। कृषक अंबर को तके खलिहान सूखे रो रहे-... Read more
'उजाला रास ना आया'
'उजाला रास ना आया' ****************** कहूँ किससे व्यथा अपनी यहाँ कितना सहा मैंने। दरिंदों से हुई लाचार लब को सिल लिया मैंने। कदम बढ़ते नहीं... Read more
उदास पनघट
"उदास पनघट" ************ छुपा कर दर्द सीने में नदी प्यासी बहे जाती। बसा कर ख्वाब आँखों में परिंदे सी उड़े जाती। निरखते बाँह फैलाकर किनारे... Read more
हिंदी को सम्मान दो
*हिंदी को सम्मान दो* संस्कृत से जन्मी हिंदी ने भाषा का संसार दिया, 'देवनागरी' लिपि में जिसने भाषा को विस्तार दिया। 'आगत' शब्द समाहित करके... Read more
ग़ज़ल
तिरही ग़ज़ल मापनी-२१२२ २१२२ २१२ काफिया-आना रदीफ़- चाहिए दर्द को दिल में छिपाना चाहिए। अश्क आँखों में न आना चाहिए। ज़ख्म उल्फ़त में मिले उपहार... Read more
कौन मनाएगा दीवाली(गीत)
"कौन मनाएगा दीवाली?"(गीत) घर -आँगन लक्ष्मी बिन सूना, नहीं तेल, दीया, बाती। रौशन दुनिया लड़ियों से है, जगमग ज्योति नहीं भाती। मान दीप का ही... Read more
धनतेरस पर दोहे
धनतेरस पर दोहे ************ धनतेरस का पर्व ये, लक्ष्मी का त्योहार। घर -घर में सबने लिए,नए-नए उपहार।। देव ,तिजोरी पूज कर,सिक्का रजत चढ़ाय। सुख-वैभव रख... Read more
मुक्तक
मुक्तक चिलमन हटी निगाह तलबगार से मिली। कंटक भरी गुलाब कली प्यार से खिली। सच कह दूँ जनाब मान जाएँगे- दर्दे ज़िगर कटार वफ़ा नाम... Read more
माँ दुर्गा के दोहे
माँ दुर्गा के दोहे *********** रक्तिम साड़ी तन सजे,गुड़हल हार सुहाय। मस्तक मुकुट बिराजता, शोभा भक्त लुभाय।। सवा रुपैया नारियल, रोली अक्षत हाथ। हलुआ पूड़ी... Read more
रात का विरह गीत
रात का विरह गीत ************* प्रेम पाश में मुझे बाँध कर प्रीत साथ में छल क्यों लाई ? रात के तन्हा आलम में रजत चाँदनी... Read more
मुक्तक
मुक्तक ख्वाब में आकर हमारे यूँ सताना छोड़ दो। हम तुम्हारे हैं सनम तुम आजमाना छोड़ दो। दर्द देकर ज़ख्म पर मलहम लगाना सीख लो-... Read more
मुक्तक
मुक्तक सजा कर प्रीत के सपने लिए तस्वीर बैठे हैं। इबादत में सनम तुझको बना तकदीर बैठे हैं। छलावा कर रही दुनिया यहाँ जज़्बात झूठे... Read more
मुक्तक
मुक्तक पिलाता रोज़ है साकी नज़र का नाम होता है। नहीं मजहब शराबी जात का बस जाम होता है। निगाहें फेर कर जब भी दिखाई... Read more
मुक्तक
मुक्तक सुनाते हाले दिल हमको कभी यूँ ग़म नहीं सहते। मनाते रूँठते हमसे ज़माने से नहीं कहते। मिलेगा क्या भला हमको वफ़ा की आरजू से... Read more
भाई -बहन का प्यारा बंधन : रक्षाबंधन (लेख)
भाई-बहन का प्यारा बंधन : रक्षा बंधन ****************************** जी चाहे बारिश की स्याही,बनूँ कलम में भर जाऊँ। मन के भाव पिरो शब्दों में,तुझको पाती लिख... Read more
रक्षा बंधन (गीत)
रक्षा बंधन (गीत) ******** तुम्हें नेह रोली तिलक लगाऊँ बढ़े प्रीत अपनी भैया ये चाहूँ तुम्हें बाँध राखी खुशियाँ मनाऊँ रक्षा कवच का उपहार पाऊँ।... Read more
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी *देश प्रेम गीत* ?वीर शपथ तुम आज लो? ********************* छंद मुक्त रचना तर्ज--फूल तुम्हें भेजा है ख़त में.. ************* वीर शपथ... Read more
(६) "रुदन" ********** पुरानी याद के धुँधले कदम जब राह में आते कसक मन में रुदन करती तुम्हें हम चाह में पाते। ठिठुरती सर्द रातों... Read more
*खेल खिलौने* , *राखी का बंधन*(सेदोका छंद)
विधा-सेदोका विषय-खेल खिलौने/ राखी का बन्धन *खेल खिलौने* ********** खेल-खिलौने घर-घर आकर बच्चों को ललचाते रंग-बिरंगे संग साथी पाकर पुलकित हो जाते *राखी का बंधन*... Read more
मुक्तक
मुक्तक ***** जहाँ इंसान बिकता है वहाँ किसका ठिकाना है। फ़रेबी बात उल्फ़त में यहाँ करता ज़माना है। समझ कर कीमती मुझको लगादीं बोलियाँ मेरी-... Read more
विषय--"उलझन" ************** जीवन में आई बाधाएँ हमको नाच नचाती हैं, सुलझ न पाए गुत्थी कोई उलझन ये बन जाती हैं। असमंजस का भाव जगातीं दिल... Read more
"मेंहदी" (हाइकु) मन भावन मेंहदी रचे हाथ पिया का साथ। पीस पत्तियाँ करतल सजाईं खूब रचाईं। मेंहदी लगी जो पिया मन भाई सुर्ख कलाई। प्रीत... Read more
"आहट तेरी लाती है" ************** बारिश में बूँदों की खनखन आहट तेरी लाती है धड़कन में साँसों की सरगम गीत प्रेम के गाती है। चूड़ी,बिछिया,झुमका,पायल... Read more
*ज़िंदगी* (कविता)
"ज़िंदगी" (कविता) ******* अजब पहेली बनी ज़िंदगी उलझ गई जज़्बातों में मोती के दानों सी बिखरी फ़िसल गई हालातों में, कालचक्र सा घूम रहा है... Read more
*ज़िंदगी* (कविता)
"ज़िंदगी" (कविता) ******* अजब पहेली बनी ज़िंदगी उलझ गई जज़्बातों में मोती के दानों सी बिखरी फ़िसल गई हालातों में, कालचक्र सा घूम रहा है... Read more
*ज़िंदगी* (कविता)
"ज़िंदगी" (कविता) ******* अजब पहेली बनी ज़िंदगी उलझ गई जज़्बातों में मोती के दानों सी बिखरी फ़िसल गई हालातों में, कालचक्र सा घूम रहा है... Read more
*खामोशी* ******* संवेगों की मौन व्यथाएँ मूक भाव अभिव्यक्ति है दमित चाह ज्यों बंद यौवना चुप्पी साधे दिखती है। कलकल स्वर में निर्झर बहता विरह... Read more
विरह गीत
विरह गीत ******** श्यामघटा घनघोर निहारत बूँद झमाझम गीत सुनाए, दादुर शोर हिया झुलसावत खेत हरी चुनरी लहराए। प्रीत लगी जब साजन से तब नैनन... Read more
"अहंकार" दोहे *********** अहंकार को त्याग दो, सर्प भाँति विषधार। अवसर पा डँस लेत है,नहीं बचा उपचार। अहंकार है शूल सम, देता घात हज़ार। मधुर... Read more
विषय- "जंग" ****** मापनी-1222×4 बना कर ज़िंदगी को जंग दानवता बढ़ाते हैं सियासी चाल शतरंजी बिछा शकुनी लड़ाते हैं बदल कर गिरगिटी सा रंग रिश्तों... Read more
राख(कविता)
*राख* ****** सुला कर गोद में अपनी झुलाया पूत को पलना तड़प कर रो उठी ममता पड़ा अपमान जब सहना। बह रहे आँख से आँसू... Read more
*पायलिया* मुक्तक
*पायलिया* ******* बरसती बारिशों में आग पायलिया लगाती है। दिलों में कोकिला सी राग भर सरगम सुनाती है। बनी ये रेशमी धड़कन ज़माने को करे... Read more
"अहंकार" दोहे *********** अहंकार को त्याग दो, सर्प भाँति विषधार। अवसर पा डँस लेत है,नहीं बचा उपचार। अहंकार है शूल सम, देता घात हज़ार। मधुर... Read more