Skip to content

मैंने हिंदी को अपनी माँ की वजह से अपनाया,वह हिंदी अध्यापिका थीं।हिंदी साहित्य के प्रति उनकी रुचि ने मुझे प्रेरणा दी।मैंने लगभग सभी विश्व के और भारत के मूर्धन्य साहित्यकारों को पढ़ा और अचानक ही एक दिन भाव उमड़े और कच्ची उम्र की कविता निकली।वह सिलसिला आज तक अनवरत चल रहा है।कुछ समय के लिये थोड़ा धीमा हुआ पर रुका नहीं।अब सक्रिय हूँ ,नियमित रुप से लिख रहा हूँ।जब तक मन में भाव नहीं उमड़ते और मथे नहीं जाते तब तक मैं उन्हें शब्द नहीं दे पाता।
लेखन :- राजेश"ललित"शर्मा
रचनाधर्म:-पाँचजन्य में प्रकाशित "लाशों के ढेर पर"।"माटी की महक" काव्य संग्रह में प्रकाशित।

Share this:
All Postsकविता (43)गज़ल/गीतिका (2)मुक्तक (6)लेख (2)दोहे (1)
कापी,पेस्ट,क्लिक के ज़माने में मौलिकता कहीं खोती जा रही है।आपकी रचना कोई चुरा कर आपके सामने प्रस्तुत करता है तो लगता है पढ़ी हुई/सुनी हुई... Read more
प्रदूषण के चलते आज पृथ्वी के अस्तित्व पर ख़तरा मँडरा रहा है।हवा का स्तर इतना ख़तरनाक हो गया है कि साँस लेना मतलब ज़हर लेना... Read more
चुनाव नज़दीक आते ही नेता "मजमा" लगाना शुरु कर देते हैं। विभिन्न वायदे फेंकते हैं,आश्वासन उछालते हैं;जो नेता लोगों को आकर्षित करता है जिस पर... Read more
लफ़्ज़ो में न दफ्नाओ
दो क्षणिकायें अलग अलग संदर्भों में प्रस्तुत हैं आशा है पसंद आयेंगी। ------------------ लफ़्ज़ों में न दफ्नाओ --------------- लफ़्ज़ों में न दफ्नाओ मेरे जज़्बातों को... Read more
लफ़्ज़ो में न दफ्नाओ
दो क्षणिकायें अलग अलग संदर्भों में प्रस्तुत हैं आशा है पसंद आयेंगी। ------------------ लफ़्ज़ों में न दफ्नाओ --------------- लफ़्ज़ों में न दफ्नाओ मेरे जज़्बातों को... Read more
सारोकार:-
सारोकार:---------"शिक्षक दिवस" ------------------------- "प्राचीन शिक्षा पद्धति-गुरुकुल"---भाग-(१) ------------------------------ भारत विश्व की प्राचीनतम संस्कृतियों में से है।यहाँ की परम्परायें भी उतनी ही पुरानी हैं।हमारी शिक्षा व्यवस्था भी... Read more
दो रचनायें प्रकाशनार्थ
दो रचनायें पाठकों के सम्मुख हैं।प्रतिक्रिया चाहूँगा। ----------------- "रुँधे गले से" ----------------- रुँधे गले से मत बोल कौन सुनेगा? जो तू कहेगा ! वो दर्द... Read more
सारोकार:-
"पत्रकारिता--गिरता स्तर" -------------------- पत्रकारिता की शुरुआत भारत में उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम चरण में हुई थी।उन दिनों प्रिंट मीडिया प्रमुख रूप से समाचार पत्रों और... Read more
उलझे धागे
"उलझे धागे"मन की उलझन को धागों की उधेड़बुन की तरह सुलझाने का प्रयास कर रही है।कैसे आप पढ़ कर प्रतिक्रिया दें। ----------------------- उलझे धागे" ---------------------... Read more
अभी उतर प्रदेश में एक बेटी के साथ छेड़खानी की घटना में जो कुछ सरेराह हुआ उसने अंत:कर्ण झझकोर दिया।उसी घटना का परिणाम;- ------------------------- "बहेलिया"... Read more
कभी कभी होता है हम किसी भी जानने वाले से हम अपना दु:ख दर्द बाँटना चाहते हैं कोई हमदर्द बनाना चाहते हैं। -----------------"हमदर्द"----------------- कुछ दर्द... Read more
" झूठ" कलयुग का महत्वपूर्ण तत्व है।सत्य कितना संभाल कर रखना पड़ता है।देखें कैसा लगता है यह "झूठ" आप को; -------------------------------- "झूठ" ------------------------------- जा रहा... Read more
हर त्यौहार हम सब अपनों के साथ मनाना चाहते हैं;जो बच्चे दूर हैं काम में संलग्न होने की वजह से नहीं आ पाते।माँ -बाप की... Read more