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पुकार- एक बेटी की
माँ...माँ...माँ .. कौन...? माँ...मैं हूँ तुम्हारे अंदर पल रहा... तुम्हारा ही अंकुर... जिसे तुमने....हाँ तुमने... कितनी ही रातें...कितने ही दिन.. अपने अरमानों सा... पाला है...... Read more
मैं कवि होकर केवल कवि का फर्ज निभाता हूँ
अत्याचारी कुटिलों को मैं, आँख दिखाता हूँ । दुखियारी आँखों के काजल, को बहलाता हूँ । मैं कवि होकर, केवल कवि का, फर्ज निभाता हूँ....।।टेक।।... Read more
जन्मदिन
शब्द शून्य हैं, भाव शून्य हैं कैसे तुम्हे बधाई दूँ ; शीतल प्राणवायु मैं तुमको क्या स्नेहिल पुरवाई दूँ । महके चन्दन सा मन पावन... Read more