Skip to content
कुछ तुम कहो
कुछ तुम कहो मुझसे कुछ मैं कहु तुमसे दूरियाँ दूर हो जाये हमसे बातों का सिलसिला चलता रहे ऐसे छुप जाए एक दूजे के निगाहों... Read more
कुछ तो है
ये कैसा रिश्ता है तेरा मेरा तेरे ख्यालो में गुजरती है राते तुझसे ही होता है सवेरा मेरा तुझको देखु जब भी ⓞⓝⓛⓘⓝⓔ दिल घबरा... Read more
फिर मिलेंगे
आऊंगा फिर कभी तेरी ओर अपने साथ लेके एक नई पहचान अभी चलता हूं फिर मिलेंगें कुछ है साथ यादों का समंदर कुछ यादों की... Read more
रिश्ता
अजीब है ये रिश्तो की पहेली अगर समझ आ जाएं तो ज़िंदगी सवर जाती है नही तो खुशियां बिखर जाती हैं कोई हमनवां की तरह... Read more