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मैं, प्रदीप तिवारी, कविता, ग़ज़ल, कहानी, गीत लिखता हूँ. मेरी दो पुस्तकें "चल हंसा वाही देस " अनामिका प्रकाशन, इलाहाबाद और "अगनित मोती" शिवांक प्रकाशन, दरियागंज, नई दिल्ली से प्रकाशित हो चुकी हैं. अगनित मोती को आप (amazon.in) पर भी देख और खरीद सकते हैं. हिंदी और अवधी में रचनाएँ करता हूँ. उप संपादक -अवध ज्योति. वर्तमान में एयर कस्टम्स ऑफिसर के पद पर लखनऊ एअरपोर्ट पर तैनात हूँ.
संपर्क -9415381880

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औरत
औरत औरत, जितना धरती होती है उससे ज्यादा अम्बर होती है, ऊंचाइयों में पहाड़ होती है, गहराई में समंदर होती है. वो जगत नियंता की... Read more
तुम
तुम अकुलाते मेघों की गड़गड़ाहट अरण्य में मयूरों का कलरव आकाश से जीवनी बरसात धरती की बुझती प्यास खेतों में बिछी गहरी हरियाली अपरिचिता के... Read more
बेटियाँ
बेटियाँ हर कोख कौम देश का अभिमान बेटियाँ कर रही हैं राष्ट्र का निर्मान बेटियाँ प्रकृति प्रदत्त प्रेम की संतान बेटियाँ प्रभू ने खुद रचा... Read more
भारत स्वच्छता मिशन
भारत स्वच्छता मिशन प्राणपन से शपथ लें हम स्वच्छता अपनाएंगे, निज निलय से कार्यालय तक सतत चमकाएंगे. स्वच्छ भारत मिशन का संकल्प मन में ठन... Read more