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मैं राघव दुबे 'रघु' इटावा (उ०प्र०) का निवासी हूं।लगभग बारह बरसों से निरंतर साहित्य साधना में लगा हुआ हूँ ।कविता ,गीत ,मुक्तक ,शेर शायरी लिखना मेरे लिए किसी आराधना से कम नहीं है । ज्यादातर मैं श़ृंगार से परिपूर्ण सृजन करता हूँ ।

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All Postsकविता (5)गीत (1)
मैं बेटी हूँ..
मैं बेटी हूँ.... ================== मैं बेटी हूँ आजाद परिंदे सी मुझ को उड़ने दो जीत जाऊंगी जग से मैं जग से मुझ को लड़ने दो।... Read more
व्याकुलता
व्याकुलता =============== औचित्य क्या मेरे जीवन का नही समझ में आया है इतराते फिरते चकाचौंध में पाश्चात्य रंग ने भरमाया है । मन में #व्याकुलता... Read more
बहुत याद आती है
बहुत याद आती है..... ============================ राजा रानी ओर परियो की बिखरे मोती ओर लडियो की कहती थीं जो एक कहानी मेरी दादी नानी वो मेरे... Read more
नजर का नजराना
नजर का नजराना ===================== मेरे महबूव सनम तेरी नजर के नजराने से मैं नजरबंद हो गया हूँ मैं नजरबंद हो गया हूँ।….. मेरा इश्क की... Read more
बंजारन
मैं बंजारन करूँ पुकार साहिब जी ! पधारो हमारे देश मेरे हो वालम बंजारे आजा अपने देश । पथ देख देख नयना पथराये मरुधर भूमि... Read more