Skip to content
तुम भीड़ भरी गलियों से गुजर जाते हो सिसकती जिंदगियों से रूबरू होते हो दर्द की करूण पुकार सुन परेशान होते हो गंदी नजर आती... Read more
स्मृति शेष
वो पके फल सी थीं।कभी भी जीवन रूपी वृक्ष से टपकने को थीं।भला कोई अमरत्व का पान कर इस दुनिया में थोड़े ही आता है।अतः... Read more
जिला में मतदाताओं के लिए "ईपिक"(मतदाता पहचान पत्र)बनाने का कार्य आरम्भ होना था।सतीश झा कार्य कुशल अधिकारी थे।उन्हें निर्वाचन प्रभारी बनाया गया।उनके निर्देशन में ईपिक... Read more
उत्कोच कवच
हामिद साहब की पोस्टिंग करीमगंज थाना में थानाध्यक्ष के रुप में हुई।उनकी पदस्थापना से इस इलाके में रहने वाले उनके समुदाय के बहुत सारे लोग... Read more
अब क्या होगा
सीपियों में नाग छूपे मुक्ता को पहचाने कौन चकाचौंध की दुनिया में अपनों को सब भूल रहे अब क्या होगा नीला थोथा आसमान का बादलों... Read more
आदमी
आदमी सोचता है कुछ लिखे....... जिंदगी के अ०यावहारिक होते जा रहे समस्त शब्द से सार्थक वाक्य बना दे मुक्त हो जाए उन आरोप से जिसे... Read more
'कमोड कथा
नमिता अपने मम्मी-पापा के साथ तीन कमरों के मकान में आराम से रहती थी।कभी-कभी आतिथियों के आगमन से असहज भी हो जाया करती थी।अपनी चीजों... Read more
अपराध बोध
"आर्दश वृद्धाश्रम" हाँ यहीं नाम था। वृद्धा ने चश्मा लगा कर बड़े ध्यान से पढ़ा। ठीक पैंतीस साल पहले पति एवं सास के साथ यहाँ... Read more