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मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक ।
मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली ।
मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है मानवता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। सर्वोच्च पूजा जीवों से प्रेम करना ।

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मुझे जहरीली हरगिज़ बोलियाँ अच्छी नहीं लगतीं
ग़ज़ल ******* 1- हँसी होठों को दे अब सिसकियाँ अच्छी नहीं लगतीं जरा शीरी ज़बां कर तल्ख़ियाँ अच्छी नहीं लगतीं 2- जला दें उन घरों... Read more
मेरा प्रथम प्रयास लघुकथा ???? समय की चोट खाकर लता बहुत निराश हो चुकी थी। इस समय उसे किसी सहारे की तलाश थी, जो उसके... Read more
विषय : आसान
?????? मुश्किले- दौर भी आसान खुदा कर देगा तुझसे खुशियों की वो पहचान खुदा कर देगा मत परेशान हो आफत-ओ-बलाओं से तू वो सिहतयाब ऐ... Read more
वतन की चाह
चाहत ये वतन की तो दिल से न निकलती है अब खुश्बू-ए-मिट्टी से हर सांस महकती है हम जाएँ कहीं लेकिन इसकी ही इबादत में... Read more
कुण्डलियाँ
कुण्डलियाँ छंद *************** नफ़रत का अब घुल गया, धुआँ अनिल में आज। प्रेम मिटा कर हो गया, गंदा आज समाज।। गंदा आज समाज,घर- घर हुए... Read more