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जज्बातो को शब्दो मे उकेरने का प्रयास है
मेरी लेखनी ही मेरे होने का एहसास है

All Postsकविता (23)गज़ल/गीतिका (2)मुक्तक (2)गीत (1)शेर (1)
नारी
औरत ने जन्म दिया मर्द को,कभी किया न अभिमान मर्द ने जाने कब जन्मा ,मर्द होने का भान जन्मा,सींचा रक्त से अपने,दिखाया ये संसार उसी... Read more
बनावट
बनावट की है दुनिया,यहां बस तमाशा कीजिए अच्छे इंसा नही तो क्या, अदाकारी अच्छी कीजिए लगाकर सजीला मुखौटा,बदरंग चेहरा छुपा लीजिए सच से नही सरोकार,जितना... Read more
औरत
निकलती है ज्यों ही औरत कमाने को आ जाते है सभी,हाथ आजमाने को कभी मित्रता, कभी मदद के बहाने खोजते है रास्ते उसे बहकाने को... Read more
दिवाली दिलवाली
आओ कुछ अलग सी मनाये दिवाली ना शोर, न धमक, न धमाके वाली कुछ सुकून ढूंढे, कुछ दे आये इस बार हो दिवाली थोडी दिलवाली... Read more
बूढी दिवाली
इक दूजे से पूछे दो बूढी नजरे सवाली आयेगा बेटा क्या ,चंद रोज मे है दिवाली आऊंगा इस दफा हर बार यही कह देता है... Read more
मेरा रावण मित्र
आज हमारे एक लेख पर कियामित्र ने प्रश्न क्यों इतना गंभीर लेख ये दशहरे का है जश्न हमने कहा कौन रोकता,जश्न तुम मनाओ दशहरे का... Read more
अहम की पोटली
सुनो अहम की जो पोटली है तुम्हारे पास फिरते हो जिसे लिये दिन रात आज उसे खोल दो ढूंढो कुछ एहसास होगें दबे इसमे मिल... Read more
आकर राधे देख लो
आकर राधे देख लो तुम कलयुगी संसार नारी का मान करे नही वो कैसे करेगा प्यार तुम्हारे समर्पण पर कान्हा ने खोला ह्रदय द्दार पर... Read more
एहराम
वो कोई और नाम लिख रहा था मेरे नाम पर परदा डाल दिया मेरे वजूद के एहराम पर बडी शिद्दत से जी रही थी जिन... Read more
रूह का हिस्सा
आंख के आंसू है......दरिया नहीं जो सूख जायेगा तुम उतार फेंको मुहब्बत का लिबास ये मेरी रूह का हिस्सा है ......... मेरे संग जायेगा
मौसम
इन आंखो मे बरसात का मौसम न मिलेगा तुम लौट के आओगे तो सावन न मिलेगा रोके से रूकेंगे न ये बहते हुये आंसू जब... Read more
बीमार कलम
कोई नहीं जानता पर मै जानती हूं बहुत अच्छा नहीं पर मै लिखती हूं आज फिर कुछ सुन्दर विचारो के साथ मै लिखने बैठ गयी... Read more
मेरा आंचल
आंचल गर बेरंग हो तो उम्मीद रहती है गर हो जाये बदरंग तो क्या कीजे जो गुनाह किया नही,उसकी सजा पाई है अब खता कर... Read more
रिश्ता दर्द का
गैरो से कहकर वो ,दर्द मे सुकून पाते है रिश्ता हमसे है दर्द का ,गैरो से निभाते है चलो इसमें भी कोई एेतराज नहीं तरीके... Read more
विचारो की गंगा
कब से मेरी रगो मे तू घूमती रही प्रतिकूलता के कारण बाहर न आ सकी ऐ मेरे विचारो ,जज्बातो की गंगा! तू जगह जगह पहुंची... Read more
जरूरत
कौन है इस दुनिया में जो दूध का धुला हो जिसके स्वभाव मे ...धरती जैसी सहनशीलता हो और मन आकाश सा खुला हो हर किसी... Read more
स्वप्नलोक
महज स्वपनलोक की सैर से उत्पन्न कविता सदियों से एक सपना है... कहो पूरा करोगे तुम ? भूल जाओ मेरे सिवा सब कुछ .... कहो... Read more
झरोखा
जिन्दगी के हर पहलू मे मैने तुझको मुडकर देखा जैसे किसी बन्द कमरे मे रोशनी का एक झरोखा सब करते है इन्तजार आये तारो से... Read more
लौहपरी चाहिए
preeti tiwari गीत Oct 2, 2016
मिट्टी के शहज़ादों को लौह परी चाहिए देखने सुनने में मदभरी चाहिए, घर बाहर के कामों में कड़ी चाहिए, मिट्टी के शहज़ादों को लौह परी... Read more
जिन्दगी
जिन्दगी ये जिन्दगी अक्सर हमे ऐसे मोड पर लाती है.. जहां कुछ नहीं,पर सब कुछ की आशा जहां अन्धकार, पर नही निराशा जहां उम्मीद किसी... Read more
यूं जीना
preeti tiwari शेर Sep 30, 2016
असल मजा आरहा है जीने मे....... मुस्कान बिखेरने और अश्क पीने मे.........
घडी भर
घडी की सुइंया हर रोज उस घडी मिलती है ......जिस घडी हम मिला करते थे ..घडी भर के लिए
टूटना
टूटकर बिखर जाना,.......समेटना आसान है... यूं दरारो में जिन्दगी नही जी जाती........
मुखौटा
नोंच लेती गर मुखौटा चेहरे पे होता उसने पूरी शख्सियत पे पर्दा किया था भारीभरकम शब्दो मे झूठ भांप मै लेती पर उसने खामोशी से... Read more
प्रतिध्वनि
कहते है हर शब्द की प्रतिध्वनि सुनाई देती है मैने तो नित प्रेम कहा, क्यों फिर घृणा सुनाई देती है इक पौधा रोपा मैने,खारे जल... Read more
जख्म
वो आया था मेरे जख्मो को देखकर.......मरहम लगाने एक नासूर उम्र भर का देकर चला गया.....
मेरा प्रेम
शब्दो के जोड तोड से गणित की तरह जो हल किया जाये नही है वो प्रेम उतार सकता है जो खुदा के चेहरे से नकाब... Read more