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एक नवागत काव्यकार, जो वरिष्ठ रचनाकारों की संगति में सीखने का इच्छुक है।

All Postsकविता (3)गज़ल/गीतिका (4)मुक्तक (4)दोहे (2)कुण्डलिया (1)
महिला
?? *अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर मातृशक्ति को नमन करते हुए एक रचना प्रस्तुत करता हूं.* ?? *जिस कोख से सबने जन्म लिया, मैं उसकी बात... Read more
बसंत का पुनरागमन
बसंत पर मन के कुछ भाव???? ""खिलें पुष्प हैं गुलशन- गुलशन, महकें मंजरीं उपवन-उपवन. फागुन की मदमस्त बयार , झूम उठाए सबके तनमन. मीठी सी... Read more
चुनाव
*एक गीतिका....* *शीर्षक  -  चुनाव* *चुनावों के बहाने से हमें नेता लुभाते हैं।* *दिखा मीठे सपन सबको गरीबो को पटाते हैं।1* *न आये याद वो जनता... Read more
संयुत
*संयुत छंद में कुछ मुक्तक* *विधान-* [सगण जगण जगण गुरु ] (112 121 121 2) 4 चरण, 1,2,4 चरण समतुकांत तथा तीसरा चरण अतुकांत। इतनी... Read more
तीन मुक्तक
तीन मुक्तक.... इंसान जगा इक आज नया जागा सपना जब टूट गया। थी नींद बड़ी गहरी उसकी। सोया बिन पीकर वो विजया।1 जी लो तुम... Read more
धुंध अंधाधुंध....
पर्यावरण की दुर्दशा पर कुछ विचार... क्या दिल्ली लखनऊ क्या, सबका है यह हाल। खुद ही गलती वह करे, खुद ही है बेहाल।1 गैस चैंबर... Read more
पंच दोहे
पंच दोहे.... पनप रहा है देश में, बहु आयामी आतंक। नहीं अछूता अब बचा, राजा हो या रंक।1 राग द्वेष भ्रष्टाचार अरु, जाति धर्म का... Read more