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Dr.pratibha d/ sri vedprakash
D.o.b.8june 1977,aliganj,etah,u.p.
M.A.geo.Socio. Ph.d. geography.पिता से काव्य रूचि विरासत में प्राप्त हुई ,बाद में हिन्दी प्रेम संस्कृति से लगाव समाजिक विकृतियों आधुनिक अंधानुकरण ने साहित्य की और प्रेरित किया ।उस सर्वोच्च शक्ति जसे ईश्वर अल्लाह वाहेगुरु गॉड कहा गया है की कृपा से आध्यात्मिक शिक्षा के प्रशिक्षण केंद्र में प्राप्त ज्ञान सत्य और स्वयं को आपके समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ।

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All Postsकविता (27)गज़ल/गीतिका (3)मुक्तक (6)गीत (5)लघु कथा (1)कव्वाली (2)
ललकार
आर्यावर्त सप्त सैन्धव सिंहजीत भारत कहलाया है इसकी पावन माटी को माता कहकर बुलाया है चरण पखारे लहराता सागर, हिमालय ने मुकुट सजाया है पश्छिम... Read more
तुम्हें
तुम्हें देखकर आ गया हमको तो मुस्कुराना थामा है हाथ मेरा नहीं छोड़ राहैं जाना जब याद तेरी आये ऐ दिलबर मेरे खुदाया तू बन... Read more
जल
जलदिवस आयोजन प्रथम प्रयास जल ईश्वर ने जब दृष्टि रची तो पंच तत्व विस्तार किया पृथ्वी के तिहाई हिस्से पर जल जीवन आधार दिया करें... Read more
निरीह गौरया
आज सुबह प्रार्थना के बाद जब विश्राम के लिये चली तो पंखुरी की चीं ची ने मुझे आवाज़ दी आँख में आँसू थे मैंने पूछा... Read more
दरश बिन
तुमसे बिछुड़े मोरे प्रभ जी भई छः मासी की रैन दरश बिन दूखन लागे नैन,दरश बिन दूखन लगे नैन जल बिन जैसे मीन अधीरा बिन... Read more
बसंती पुरवइया
चली बसन्ती पुरवइया और बाग हुआ मतवाला नन्ही कपोलो से सज गया तरुवर का पत्ता डाला करे अलाप की कोयल तैयारी, छाने लगी नव हरियाली... Read more
बेटियां ?
जीवन को जीवन बनाती बेटियां बेटो का जीवन सजाती है बेटियां इस सृष्टि को सतत बनाती बेटियां फिर क्यों कोख में मारी जाती बेटियां घर... Read more
तलाश
हाज़िर हूँ अपनी छोटी सी कोशिश के साथ वक़्त वेवक्त चौक में दौड़ती थी जो शाम अब हर रोज वही मैं शाम तलाशती हूँ जो... Read more
खिड़की
खिड़की भोर भई खिड़की मैं खोली बड़े हौले से खिड़की बोली कभी हृदय के पट को खोलो सत्य पुंज को कभी टटोलो बड़ा अंधेर फैल... Read more
भू -घटा संवाद
वारिश का मौसम और वरसात आत्मा की पुकार परमात्मा से सुनिए धरा क्या कहती है घटा से एक आत्मीय संवाद भू घटा संवाद काली घटायें... Read more
जय जवान जय किसान
राष्ट्र कहे सुन ओ जवान जय जवान जय किसान हैं हिम से शीतल सूर्य समान मातृभूमि के तुम अभिमान कर्मठता 'बा'और 'भावे' की तुमसे अर्थ... Read more
याद करो कुर्बानी
[8/8, 6:09 PM] Dr Pratibha: आओ याद करें क़ुरबानी खोये हमने जो बलिदानी स्वप्न संजोया अखण्ड भारत ऐसे महापुरुष त्यागी ज्ञानी लड़े स्वतंत्रता की खातिर... Read more
छाती
छाती माँ की ममता से पूरित छाती प्रसव पीड़ के बाद छाती शिशु को स्तन पान करवाती ईश्वर की अनुपम दें है छाती मानव शक्ति... Read more
हुंकार
कई छिपे गद्दार कन्हैया से घर में कई ज़ाकिर कई मीर है कहीँ सत्ता लोलुप आँखों में लालच की दिखती लकीर है तक्षशिला को खो... Read more
एक सुबह
एक सुबह देखी मैंने खंजन तरुवर साख पे वो बैठी थी नैन बसी कोई अभिलाषा वो हृदय आस लिए बैठी थी आते जाते हर पंक्षी... Read more
वो वैश्या
मैंने एक वैश्या को देवी से ऊपर देखा एक पण्डित को उसके कदमो में गिरते देखा समझ न आया फिर भी लेकिन दृश्य ये देखा... Read more
घुटती सिसकियां
------ घुटती रहेंगी आखिर कब तक सिसकियाँ दरवाजो में लुटती रहेगी कब तक नारी वासना के गलियारों में भ्रूण हत्या दहेज हत्या ग्लैमर के नंगे... Read more
वही आवाज़
SUPRABHAT मित्रों आज फिर से उसने आवाज लगाईं जो मुझे सुनाई मीरा सूर काली औ कबीरा सूफी सांत औ गाये फकीरा तू मेरा है मैं... Read more
सबक
सबक रोज ज़िन्दगी देती है हमें मिलती नहीं दोस्ती कहती है हमे जो मित्र दोस्त हमराही कहते रहे आज नज़र भर न देख पाते है... Read more
मुक्ति
कर्म योग्यता और संस्कार सबसे ऊपर मेरा प्यार निस्वार्थ प्रीत जो मन लाये मैं मेरा उसका मिट जाये चाहे कोई विकट हो मेरा भक्त मुझे... Read more
संगीत दिवस
सारा दिन हुई योग की चर्चा आओ अब गीत शारदे गा लें संगीत की बज उठे तरंगे उमंगो में सरगम सजा लें गीतिका वरखा सुनाए... Read more
झुलस
धरती के झुलसते आँचल को अम्बर ने आज भिगोया है झूम उठे वायु संग तरुवर बूंदों में शीत पिरोया है ये महज़ एक झांकी है... Read more
प्रेम
जीवन अधूरा प्रेम बिना भक्ति अधूरी प्रेम बिना है समर्पण अधुरा ही प्रेम बिना है हर भाव अधुरा प्रेम बिना ज्ञान अधुरा अध्यात्म अधुरा इस... Read more
पापा
मुझे लगता नहीं पापा कि कोई दिन विशेष हो तुम्हें याद करने के लिए भी तुम तो रोज मेरे शीशे में मुझे पूछते हो और... Read more
मुक्ति
कर्म योग्यता और संस्कार सबसे ऊपर मेरा प्यार निस्वार्थ प्रीत जो मन लाये मैं मेरा उसका मिट जाये चाहे कोई विकट हो मेरा भक्त मुझे... Read more
अफ़सोस
अफ़सोस जताने ये मन निकला क्यों ज्ञान में खोखलापन निकला हम करते रहे श्रेष्ठ सिद्ध स्वयं को मन से न अहम का घुन निकला परिवार... Read more
मिथक
कल्पना में मत उलझ है मिथक सारा जगत सत्य से रु-ब-रु हो जन्म से आरम्भ जो हो इससे परे मैं हूँ सदा अदृश्य जो सदृश्य... Read more
साथ
जिनके साथ चले हम घर से वे तो दूर बड़े रे निकले सोचा चोट अब स्वस्थ हो गई देखा घाव घनेरे निकले जिनको समझ रौशन... Read more
हमें
सबक रोज ज़िन्दगी देती है हमें मिलती नहीं दोस्ती कहती है हमे जो मित्र दोस्त हमराही कहते रहे आज नज़र भर न देख पाते है... Read more
तुम
तुम प्रेम के मीठे अहसास में भक्ति के तुम दुरूह मार्ग में नहीं प्रयास प् सकता तुमको तुम समर्पण के सरल भाव में कर्मयोगी परमहंस... Read more
नमन
मन्द पवन कहे मतवारी गाये यही कोयलिया कारी प्रातःनमन सर्वोच्च शक्ति को जिसने महकाई सृष्टि सारी 29 जुलाई2016
दर्द
मालूम है उसे कहाँ होता है वो ज़ालिम वहीँ पर चोट देता है बनके समझदार हमेशा ही करीने से मेरा दिल तोड़ देता है हंसकर... Read more
भक्ति भाव
कुछ भी कर सकते हो तुम सर्वश्रेष्ठ सर्व समर्थ हो तुम शब्दों के मोती बन जाते भक्ति भाव जग देते तुम अदृश्य रहो कण कण... Read more
पतन
हमारा आध्यात्म कमजोर हुआ हमारी संस्कृति अपंग होने लगी फिर सभ्यता खोने लगी नारी तब रोने लगी। पतन फिर होने लगा मार्ग पथभ्रष्ट हो गया... Read more
हरियाला सावन
हरा भरा हरियाला सावन मन भाये मतवारा साजन प्यासी प्रीत धरा की जागी उर को वुझावे आ नीलगगन महक उठी अब डाली डाली गाए मल्हार... Read more
मानव मन
मैली चादर मानव का मन चातुर्य कला में निपुण है आदम ज्ञान की बातें गीता दर्शन कर्म का चन्दन पर औरों का मन संस्कार की... Read more