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हाइकुकार :
♢ प्रदीप कुमार दाश "दीपक"
♢ सम्प्रति : हिन्दी व्याख्याता
13 कृतियाँ : -- मइनसे के पीरा, हाइकु चतुष्क, संवेदनाओं के पदचिह्न, रुढ़ियों का आकाश, हाइकु वाटिका, हाइकु सप्तक, हाइकु मञ्जूषा, झाँकता चाँद, प्रकृति की गोद में, ताँका की महक, कस्तूरी की तलाश, छत्तीसगढ़ की हाइकु साधना, वंदेमातरम् ।

Hometown: रायगढ़
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All Postsकविता (7)हाइकु (25)
कस्तूरी की तलाश (पाँच रेंगा)
__________________________________ कस्तूरी की तलाश ( विश्व का प्रथम रेंगा संग्रह ) अयन प्रकाशन दिल्ली संपादक : प्रदीप कुमार दाश "दीपक" रेंगा क्र. 01 0 जीवन... Read more
हाइकु मंजूषा
हाइकु मंजूषा में रचनाकारों को प्रकाशित करने का उद्यम -------------------------------------------------------------------- समकालीन हाइकु 1. डॉ. रमाकान्त श्रीवास्तव बजती कहीं छिपी पंख बाँसुरी गूँजे अरण्य । लगे... Read more
मइनसे के पीरा [छत्तीसगढ़ी हाइकु संग्रह की समीक्षा]
छत्तीसगढ़ी हाइकु संग्रह : मइनसे के पीरा : प्रदीप कुमार दाश "दीपक" छत्तीसगढ़ी का प्रथम हाइकु संग्रह : प्रकाशक - छ. लेखक संघ सरिया MAINSE... Read more
झाँकता चाँद की समीक्षा
झांकता चाँद : (साझा हाइकु संग्रह) प्रकाशन वर्ष - जनवरी 2017 संपादक :प्रदीप कुमार दाश "दीपक" झाँकता चाँद-एक प्रतिबिम्ब सुनहरे कल का समीक्षक : सुशील... Read more
रुढ़ियों का आकाश [सेन्रियू संग्रह की समीक्षा]
"रुढ़ियों का आकाश" प्रदीप जी द्वारा रचित हिन्दी का प्रथम सेनरियू संग्रह                  सेनरियूकार : प्रदीप कुमार दाश "दीपक"        समीक्षक : डाॅ. सुधा गुप्ता प्रकाशन... Read more
हाइकु वाटिका की समीक्षा
हाइकु वाटिका [साझा हाइकु संग्रह] संपादक - प्रदीप कुमार दाश "दीपक" प्रकाशक :    माण्डवी प्रकाशन, गाजियावाद (उ.प्र.) प्रकाशन वर्ष : फरवरी 2004      मूल्य : 100/----... Read more
हाइकु सप्तक की समीक्षा
हाइकु सप्तक : संपादक - प्रदीप कुमार दाश "दीपक" [ हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ सात हाइकुकारों का परिचय, हाइकु एवं उनके हाइकु संबंधी विचार ] प्रकाशक... Read more
हाइकु : गर्मी/ग्रीष्म/लू/धूप/तपन/घाम
प्रदीप कुमार दाश "दीपक" ------------------ गर्मी/ग्रीष्म कालीन हाइकु 01. करारी धूप कड़कने लगी है री! गर्मी आई । ☆☆☆ 02. धूप से धरा दरकने लगी... Read more
हाइबन
प्रदीप कुमार दाश "दीपक" _______________________ हाइबन बड़े भैया और मैं दोनों तीस वर्ष लंबे अंतराल के बाद घुमने निकले । घने विहड़ वनों की राहों... Read more
माँ
प्रदीप कुमार दाश "दीपक" ------------------ माँ 01. माँ का आँचल छँट जाते दुःख के घने बादल । --0-- 02. खुशियाँ लाती तुलसी चौंरे में माँ... Read more