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शोधार्थी, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी(उ0प्र0)
साहित्य पशुता को दूर कर मनुष्य में मानवीय संवेदनाओ का संचय करता है एवं मानवीय संवेदनाओ के प्रकट होने से समाज का कल्याण संभव हो जाता है । इसलिए मैं केवल समाज के कल्याण के लिए साहित्यिक हिस्सा बनकर एक मात्र पहल कर रहा हूँ ।

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