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खोफ
Raj Vig कविता Oct 29, 2017
सजा से तेरी यहां अब कोई डरता नही माथे को तेरे द्वार पे टिकाने के बाद गुनाह करने से कोई झिझकता नही । कौन है... Read more
लकीरें
Raj Vig कविता Oct 7, 2017
खिंची हैं मेरे हाथों मे कुछ टेढ़ी मेढ़ी सी लकीरें कंयू मिटती नहीं है लिखी गयी हैं जो तकदीरें । आंखों से नज़दीक दिखते हैं... Read more
सांसें
Raj Vig कविता Sep 30, 2017
आंखों से आंसू टप टप गिर रहे थे सीने से गमो के तूफान उठ रहे थे बोटी बोटी इन्सानियत का कत्ल हुआ था एक जंगली... Read more
सीख
Raj Vig कविता Sep 17, 2017
जंत्र मंत्र तंत्र सब करके देख लिया पंडित ज्ञानी ध्यानी सब पूछ के देख लिया । उनका कहना करना सब करके देख लिया लोगों के... Read more
दिल के करीब
Raj Vig कविता Sep 9, 2017
मुद्दतों के बाद फिर कोई दिल के करीब आया है नया चेहरा लेकर जज्बात वो पुराने लाया है । आंखों मे प्यार बसा कर कोई... Read more
पहली बार
Raj Vig कविता Sep 1, 2017
वादा किया है जिन्दगी से मैने पहली बार करना नही पड़ेगा अब उसे और इन्तजार ले जाऊंगा उसे मै सपनो के द्वार महकेगी जब जिन्दगी... Read more
गुजरे लम्हे
Raj Vig कविता Aug 26, 2017
गुजर गये हैं जो लम्हे जिन्दगी के लौट कर नही आयेंगे वो मुकाम बीते सफर के । गुजर गये हैं जो तूफान गमो के साथ... Read more
कृपा दृष्टि की आस
Raj Vig कविता Aug 20, 2017
कृपा दृष्टि की आस लिये ढूंढ रहा है, वो तुझे मुरारी वृन्दावन की उन गलियों मे जहां गूंजी थी, तेरी किलकारी । मोह माया से,... Read more
शान
Raj Vig कविता Aug 12, 2017
जंगल मे जानवर बहुत हैं भालू, चीता, हाथी सबकी अपनी आन है लेकिन जब निकलता शेर अपनी मांद से है उसकी अलग अपनी शान है... Read more
किसी की खातिर
Raj Vig कविता Aug 6, 2017
रास्ते तो बहुत मिले थे मंजिलो को पाने के किसी की आंखों की नमी देख कदम मैने उठाया ही नही । मौके तो बहुत दिये... Read more
चिन्तन
Raj Vig कविता Aug 2, 2017
चिन्तन करने लगा हूं मै उस जहान का लौटा नही जहां से कोई मै उस आसमान का । चिन्तन करने लगा हूं मै हवा के... Read more
अन्तर्मन की चेतना
Raj Vig कविता Jul 22, 2017
वो पिटता लुटता रहा वो लहुलुहान होता रहा वो चिल्लाता पुकारता रहा मै वीडियो बनाता रहा । उसके पास जाने से मै कतराता रहा आवाज... Read more
ये कैसी अखबार
Raj Vig कविता Jul 18, 2017
ये कैसी अखबार मै पढ़ने लगा हूं दिन दहाड़े सबके सामने झपट मारी रोज बेआबरू होती अबला नारी छोटी छोटी बातों मे मारा मारी ।... Read more
सूखा पत्ता
Raj Vig कविता Jul 1, 2017
वो भी कभी बहारों का हुआ करता था हिस्सा गिरा पड़ा था सड़क पर जो सूखा निर्जीव पत्ता । प्रकृति ने साथ दिया नही जडों... Read more
जो किये थे कसूर
Raj Vig कविता Jun 24, 2017
अपमान किया है उसने किसी का बेआबरू कर दिखाया है गरूर दी है सजा उसने किसी को जो था बिल्कुल बेकसूर । मिलेगा उसे इसका... Read more
कल्पना से परे
Raj Vig कविता Jun 17, 2017
कल्पना से परे जो जहान है मिले तुझे ये मेरा अरमान है फूलों से भरी जो राहें हैं मिले उन्हें जो तेरे पांव हैं ।।... Read more
पन्ने
Raj Vig कविता Jun 4, 2017
मिटा दिये हैं मैने रूलाते थे बहुत जब याद आते थे अतीत के मायूस पन्ने । कोशिशें की हैं मैने भुलाने की नफरतें उभर न... Read more
नरक का दंड
Raj Vig कविता May 22, 2017
कर्मो का समय जब मेरा पूरा हुआ प्रभु के आदेश से यमराज दूतों के साथ प्रकट हुए मुझे मेरे शरीर से अलग किया गया और... Read more
खिल उठा है कमल
Raj Vig कविता May 7, 2017
खत्म हुआ है सिलसिला अब बातों का आ गया है वक्त कछ कर जाने का । गुजर गया है दौर तूफानो का आया है मौसम... Read more
जिन्दगी
Raj Vig कविता Apr 29, 2017
माया के चक्र मे भ्रमित है हर इक जिन्दगी अधूरी इच्छाओं से ग्रसित है हर इक जिन्दगी । चिन्ताओं के भंवर मे कल्पित है हर... Read more
दोस्त
Raj Vig कविता Apr 16, 2017
बदला है रूप जिन्दगी ने दोस्तों ने चेहरे बदल लिये चलते थे जो रोज साथ साथ उन्होंने आज रस्ते बदल लिये । आंखों से पहचानते... Read more
रूप गज़ब है
Raj Vig कविता Apr 8, 2017
ख्वाब लिये मै आंखों मे पहुंचा हूं उन गलियों मे जहां नाम तेरे की चर्चा है गलियारों और मयखानों मे । रूप गज़ब है यौवन... Read more
सड़क किनारे
Raj Vig कविता Apr 1, 2017
सिसकता सुबकता वो सारी रात रहा दो रोटी की जुगाड़ मे भटकता वो सारा दिन रहा । गरीब कमजोर होने की सजा वो बर्दाश्त करता... Read more