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ऐसा जीवन
क्लेष,ईर्ष्या,द्वेष,क्रोध रुपी अनल का प्रभंजन यज्ञ की आहुति,उपासना एवं हवन शुद्ध,सुरभित जीवन,निर्मल मन जैसे अग्नि से तप्त हो स्वर्ण हुआ कुंदन ऐसे ही सद्भभाव की... Read more
व्यथित पर्यावरण
व्यथित पर्यावरण अंगार चण्ड निदाघ ताप धिक् मानव किया तूने प्रकृति का सत्यानाश भू-स्खलन,पर्वत स्खलन,मृदा अपर दन परितंत्र का क्षरण, प्रदूषण का प्रभंजन नगाधिराज हतप्रभ... Read more
वैशाखी आयी
वैशाखी आयी शस्योत्सव हरित जड़ित नवान्न की झांकी आई हुई प्रकृति नन्दित तरु, विटप पर स्वर्ण क्रान्ति आई नव बालियों की मुक्ता से अलंकृत नव-वधू... Read more
आशा
आशा आशा, संकल्प, श्रद्धा, ज्ञान का कर वरण तिमिर ने ओढा शुभ्र वितान आ रहा अब अलौकिक,दिव्य विहान संवेदना का किरीट,स्वर्णरश्मि का दिव्य ज्ञान प्रशस्त... Read more
मंगलकारी नवरात्रि
चैत्र मास की वासन्तिक मंगलकारी नवरात्रि आदिशक्ति माता का पदार्पण ,करें हम आरती नैवेद्य, अक्षत, रोली, पुष्प-प्रसाद सह माता को असीम श्रद्धा पुकारती सुस्वागतम् माता... Read more
आह्वान
आह्वान संस्कृति की गात पर डार, द्रुभ, पात-पात पर आज पुनः हम आचार, नैतिकता, मानवता का आह्वान करें... द्वेष, भ्रष्टाचार, आडम्बर, अहंकार का त्याग करें...... Read more
महिला दिवस
वेदों में माता तुम, पुराणों की गाथा तुम नव स्वरूपों की अधिष्ठाता तुम... जननी, सुता, सहचरी, प्राण निहित है तुममे सृष्टि का कल्याण... सरस्वती रूपा... Read more
होली
होली फाल्गुन के सतरंगी कलश का उपहार करो "देव राज मित्तल" से स्वीकार सर्वश्री आदरणीय "जसबीर" संग "दिग्विजय" मस्तक पर शोभित करुँ स्नेहिल अबीर सादर... Read more
नववर्ष
नववर्ष पर मेरे विचारों का यह अनुअंकन व्यतीत होते वर्ष को करे प्रणाम दीं जिसने हमें सुखद अनुभूतियाँ,सान्निध्य में जिसके विस्मृत हो गईं सकल विसंगतियां... Read more
नूतन वर्ष  मांगलिक अभिनन्दन
नववर्ष पर मेरे विचारों का यह अनुअंकन व्यतीत होते वर्ष को करे प्रणाम दीं जिसने हमें सुखद अनुभूतियाँ,सान्निध्य में जिसके विस्मृत हो गईं सकल विसंगतियां... Read more
प्रेम
"प्रेम" एक व्यापक एवं दिव्य शब्द है..असीम अनुराग में मनुष्य स्नेहासिक्त हो अपने प्रिय हेतु सर्वसमर्पित होता है... माता-पिता,भगिनी-भ्राता,पुत्र-पुत्री,पति-पत्नी प्रियतम आदि विविध स्वरूपों में जब... Read more
मित्रता
सभी मित्रों को "मित्रता दिवस" की शुभकामनाएं--------- मित्रता एक अक्षर नहीं... शब्द नही...पंक्ति नहीं... गद्य नहीं...कोई पद्य नहीं... मित्रता तो पवित्र "चारु" है..."आराधना" है "अर्चना"... Read more