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मैं कमलेश गोयत। हिंदी उपन्यास लिखती हूँ। कविता लिखने की कोशिश भी करती हूँ। मेरा दूसरा उपन्यास विजेता आजकल साहित्यपीडिया पर प्रकाशित हो रहा है । 250 पृष्ठों का यह उपन्यास आपका भरपूर मनोरंजन करेगा। यह हर पाठक वर्ग के लिए पठनीय है। यह ऐसी बेटी की कहानी है जिसके दादा-दादी अंधविश्वास के कारण उसे अपने बहू-बेटे को बिना बताए त्याग देते हैं और परिस्थितयाँ कुछ यूं बदलती हैं कि वही दादा-दादी अपनी उस पोती के लिए उपवास करते हुए प्राण त्याग देते हैं।

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All Postsकविता (11)गज़ल/गीतिका (1)लघु कथा (1)
होली के बहाने
नफरत को सुला प्रीत दिलों में जगा लें होली के बहाने, छोड़ जाए जो प्यार का पैगाम,उस रंग को लगा लें होली के बहाने। लाल,पीला,नीला,हरा... Read more
विजेता
माफी चाहती हूँ। अति व्यस्तता के चलते कई दिनों बाद पोस्ट कर रही हूँ। अब विजेता को आगे पढें। "देख बेटा,मैंने पाँच छोरियाँ भी ब्याही... Read more
विजेता
आपने पढ़ा कि शमशेर और राजाराम नामक दो निसंतान व्यक्ति अपनी पत्नियों के साथ पाँच बरसी बाबा के दर पर जाते हैं और बाबा जी... Read more
विजेता
विजेता उपन्यास तीन परिवारों की कहानी है। आज पृष्ठ संख्या ग्यारह में पढ़िए तीसरे परिवार का जिक्र। यहाँ से भाग तीन शुरु होता है। शमशेर... Read more
विजेता
आपने पढ़ा कि राजाराम अपनी पत्नी के मन को खुश रखने के लिए पाँच बरसी बाबा के पास जाने को तैयार हो जाता है। अब... Read more
विजेता
आगे पढ़िए विजेता उपन्यास की पृष्ठ संख्या आठ। यह सुनकर ममता ने दांतों तले उंगली दबा ली। वह हैरान होकर बोली,"अच्छ्या री माँ! उस बाबा... Read more
विजेता
विजेता की पृष्ठ संख्या सात पढ़िए। हमेशा की तरह वह घी,आचार और फलों का थैला भरकर अपने साथ लाई थी। नीमो ने रोते-सुबकते हुए अपनी... Read more
विजेता
आज आप पढ़ें विजेता की पृष्ठ संख्या पाँचऔर छ:। नीमो तो हर शाम बच्चों के साथ बच्ची बन अपने बचपन का दीदार कर लेती थी... Read more
विजेता
आज आप पढिए विजेता उपन्यास की पृष्ठ संख्या चार। वह खामोश था परन्तु उसके अंदर एक तूफान-सा उठ खड़ा हुआ था। भाभी द्वारा कहे गए... Read more
विजेता
आज पृष्ठ संख्या तीन पढ़िए। विजेता उपन्यास को अगर आपने शुरू से नहीं पढ़ा तो आप इस अनूठी कहानी का लुत्फ नहीं उठा पाएँगे। इसलिए... Read more
विजेता
आपने पढ़ा विजेता उपन्यास का पहला पेज। अब पढ़ें दूसरा पृष्ठ। उसे देखते ही शमशेर ने उससे प्यार से कहा,"चल गोलू लाडो।" शमशेर ने अपनी... Read more
विजेता
शमशेर ने अपनी धोती को निचोड़ते हुए अपनी पत्नी बाला से कहा,"भाग्यवान! तावली-सी चढ़ा ले कढ़़ाइये नै! मैं नहा लिया सूं और ईब गोलू नै... Read more