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लेखन विधायें- कहानी, कविता, गज़ल, नज़्म हाईकु दोहा, लघुकथा आदि | प्रकाशन- कहानी संग्रह [वीरबहुटी], [प्रेम सेतु], काव्य संग्रह [सुबह से पहले ], शब्द माधुरी मे प्रकाशन, हाईकु संग्रह- चंदनमन मे प्रकाशित हाईकु, प्रेम सन्देश मे 5 कवितायें | प्रसारण रेडिओ विविध भरती जालन्धर से कहानी- अनन्त आकाश का प्रसारण | ब्लाग- www.veerbahuti.blogspot.in

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All Postsकविता (17)गज़ल/गीतिका (31)दोहे (6)लघु कथा (1)कहानी (15)हाइकु (1)
कमी हिम्मत में कुछ रखती नहीं मैं-------  गज़ल
कमी हिम्मत में कुछ रखती नहीं मैं बहुत टूटी मगर बिखरी नहीं मैं बड़े दुख दर्द झेले जिंदगी में मैं थकती हूँ मगर रुकती नहीं... Read more
दोहरे मापदंड --कहानी--- निर्मला कपिला
दोहरे मापदंड --कहानी *देख कैसी बेशर्म है? टुकर टुकर जवाब दिये जा रही है।भगवान का शुक्र नहीं करती कि किसी शरीफ आदमी ने इसे ब्याह... Read more
अगरचे मैला साधू संत  का किरदार हो  जाये---- गज़ल
अगरचे मैला साधू संत का किरदार हो जाये तो मजहब धर्म सब उसके लिये व्यापार हो जाए लडाई हक की जो लडता रहा ताउम्र दुनिया... Read more
सजाया ख्वाब काजल सा वो आन्सू बन निकलता है
सजाया ख्वाब काजल सा वो आन्सू बन निकलता है उजड जाये अगर गुलशन हमेशा दिल सिसकता है जमाने भर की बातें हैं कई शिकवे गिले... Read more
हाइकु
हाईकु साथ जो छूटा आसमान से जैसे तारा हो टूटा खून पसीना बहाता है किसान फिर दे जान? आँगन मे मेरे आया है मधुमास लेकर... Read more
रुबाइ गज़ल गुनगुनाने की रातें ----- गज़ल
---- रुबाइ गज़ल गुनगुनाने की रातें उसे हाल दिल का सुनाने की रातें वो छूना छुआना नज़र को बचा कर शरारत अदायें दिखाने की रातें... Read more
वो बच्चों के लिए खुद का निवाला छोड़ देती है -- गज़ल
यशोद्धा खाने को मक्खन का प्याला छोड़ देती है न रूठे शाम, हाथों की वो माला छोड़ देती है छठा सावन की लाती है बहारें,झूमता... Read more
गज़ल गुलकन्द सी मीठी लगे अन्दाज प्यारा है ---- गज़ल
गज़ल गुलकन्द सी मीठी लगे अन्दाज प्यारा है अदावत है लियाकत है मुहब्बत से सँवारा है हमारी प्यास ढूंढे रोज सागर प्यार के गहरे मुशक्कत... Read more
मैं नेता बनूंगा  -- कविता--- हास्य व्यंग
मैं नेता बनूंगा एक दिन बेटे से पूछा ;बेटा क्या बनोगे?: कौन सा प्रोफेश्न अपनाओगे,किस राह पर जाओगे वह थोडा हिचकिचाया,फिर मुस्कराया और बोला मैं... Read more
दोहे
सब धर्मों से ही बडा देश प्रेम को मान सोने की चिडिया बने भारत देश महान । शाम तुझे पुकार रही सखियाँ करें विलाप पूछ... Read more
व्यंग -- बुढापे की चिन्ता समाप्त  ये व्यंग  3 /10/10 का है  लेकिन इस बार फिर उम्मीद जगी है[ कल सपना जो आया!
व्यंग -- बुढापे की चिन्ता समाप्त आज कल मुझे अपने भविष्य की चिन्ता फिर से सताने लगी है। पहले 20 के बाद माँ बाप ने... Read more
प्रेम सेतु (कहानी ) -----मेरी  पुस्तक प्रेम सेतु से
प्रेम सेतु (कहानी ) -----मेरी पुस्तक प्रेम सेतु से जीना तो कोइ पटेल परिवार से सीखे1 जीवन रूपी पतँग को प्यार की डोर से गूँथ... Read more
मुझे तुमसे या दुनियां से गिला क्या ---- गज़ल -निर्मला कपिला
मुझे तुमसे या दुनियां से गिला क्या मिली तकदीर से हम्को सजा क्या बेटियां मां बाप से जब दूर जातीं बिना उनके जिगर मे टूटता... Read more
गज़ल----- निर्मला कपिला   उलझनो को साथ ले कर चल रहे हैं
गज़ल----- निर्मला कपिला उलझनो को साथ ले कर चल रहे हैं वक्त की सौगात ले कर छल रहे हैं ढूंढते हैं नित नया सूरज जहां... Read more
अखिर क्यों----   कविता  ये 2010 मे लिखी गयी कविता आज भी उतनी ही प्रासंगिक है
अखिर क्यों---- ये 2010 मे लिखी गयी कविता आज भी उतनी ही प्रासंगिक है विस्फोटों की भरमार क्यों है दुविधा में सरकार क्यों है आतंकी... Read more
कहानी---  गुरू मन्त्र----  निर्मला कपिला
कहानी--- गुरू मन्त्र---- निर्मला कपिला मदन लाल ध्यान ने संध्या को टेलिवीजन के सामने बैठी देख रहें हैं । कितनी दुबली हो गई है ।... Read more
दोहे
सूरत से सीरत भली सब से मीठा बोल कहमे से पहले मगर शब्दों मे रस घोल रिश्ते नातों को छोड कर चलता बना विदेश डालर... Read more
बेखुदी मे अश्क आँखों से बहाता ही रहा मै   - गज़ल
गज़ल बेखुदी मे अश्क आँखों से बहाता ही रहा मै सह लिया खुद दर्द लोगों को हसाता ही रहा मै देख अन्जामे मुहब्बत आज भी... Read more
पूर्व पर पश्चिम का लिबास कैसा विरोधाभास ?
कविता पूर्व पर पश्चिम का लिबास कैसा विरोधाभास ? श्रद्धा हो गयी लुप्त रह गया केवल् श्राद्ध आभार पर हो गया अधिकार का हक सम्मान... Read more
मृ्ग अभिलाशा ---हम विकास की ओर !--कविता [सुबह से पहले  काव्य संग्र्ह से
( कविता ) मृ्ग अभिलाशा हम विकास की ओर ! किस मापदंड मे? वास्तविक्ता या पाखन्ड मे ! तृ्ष्णाओं के सम्मोहन मे या प्रकृ्ति के... Read more
भगत सिंह का क्षोभ---- सुनो मेरी आत्मा की आवाज
भगत सिंह का क्षोभ आँखोंसे बहती अश्रुधारा को केसे रोकूं आत्मा से उठती़क्षोभ की ज्वाला को केसे रोकू खून के बदले मिली आजादी की क्यों... Read more
उनींदे से भटकते मेरे अब अरमान लगते हैं  गज़ल
उनींदे से भटकते मेरे अब अरमान लगते हैं कभी बेचैन लगते हैं कभी नादान लगते है जहानत ही नहीं काफी ज़माना जीतना हो तो झुके... Read more
चाहतों की लाश सडती मुफ्लिसी के सामने -- गज़ल
चाहतों की लाश सड़ती मुफलिसी के सामने ज़िंदगी सहमी रही उस बेबसी के सामने ताब अश्कों की नदी की सह न पायेगा कभी इक समन्दर... Read more
*इन्विट्रो फर्टेलाईजेशन* के साईड एफेक्ट  पर एक कहानी
*इन्विट्रो फर्टेलाईजेशन* जैसे अविष्कार ने आज कल जिस तरह एक व्यापार का रूप ले लिया है,जैसे कि कुछ लोग तो सही मे औलाद चाहते हैं... Read more