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दोहे
हर चुनाव में सुन रहा पुल पुलिया निर्माण। बाढ़ समस्या मिटेगी राज नीति के वाण।। सड़के सब गड्ढा बनी ऐसा हुआ विकास।फरी फरी सब चर... Read more
कविता
क्षेत्र का खूबै करब विकास जीति जइबै ना अइबै पास करै नेता नकटा दिन राति। बकावै वोटरन का हरि भांति।। बड़ा कमजोर बना असहाय। गाय... Read more
दोहे
नगर नगर में हैं खुली शिक्षा की दूकान। डिग्री ऐसे विक रही जैसे बीड़ी पान। जिन्दा मुर्दा हो कोई सबको मिले प्रवेश। भारीभरकम फीस है... Read more
कविता
नामनेशन इलेक्शन शुरू होय गवा। वोटरन ते कनेक्शन शुरू होय गवा। नातेदारी पुरानी सबै चलि गयी। गाड़ी ठाढी कबाड़ी सबै चलि गयी। वोट हम दीबै... Read more
चोपाई
जगह जगह होती है चर्चा । कौन भरी अबकी ते पर्चा।। केहिका मिली टिकटु मोरे भाई।कीते कीकी फंसी लड़ाई। बरसी तेरही जो सुनि पावै।धाय दुआरे... Read more
कविता
हम न जीतब तौ उनका हराय दीबै। ई इलेक्शन मा तिगड़ी लगाय दीबै। साल भर ते किहा दौरा हम क्षेत्र मा, अपनि ओकाति सबका देखाय... Read more
कुण्डलियाँ
गल्ली गल्ली होर्डिंग फोटोम जोड़े हाथ। पच्चिस गाड़ी मोटरे चलती उनके साथ। चलती उनके साथ रायफल वाले चिमचा। मौज रहे है काटि काल्हि बेचति थे... Read more
दोहे
वंश वाद की फल रही राजनीति में बेल। दल बदले सत्ता मिले वही पुराना खेल। पिता पुत्र चाचा सगे महासमर में आज। कुरुक्षेत्र सूबा बना... Read more
दोहे
नये वर्ष पर चढ़ गया ,मित्र चुनावी रंग। नेता चिल्लाने लगे ,जैसे पी हो भंग। दलों की है लाचारी,बन्द है नोट हजारी।। बिगुल चुनावी बज... Read more
रंगोली
*अंतिम तिथि 15 फरवरी 2017* आत्मीय साहित्यप्रेमियों सादर नमन आप लोंगो की साहित्यिक रचनाये काव्य रंगोली साहित्यिक पत्रिका के अप्रैल 2017 अंक हेतु सादर आमंत्रित... Read more