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प्रेम पाती
लिखते लिखते पाती तुमको, कितनी सुबहें शाम हो गई। खत के उसके इंतजार में, सारी जिंदगी तमाम हो गई। भूल न पाऊं तेरी बातें खत... Read more
बीस वर्ष
दिल के अरमान, सुनहरे सपनों की डोर पिया है तुमसे बांधी। तुमसे रिश्ता मेरा नहीं तोड़ पाई, तुम्हारे कुछ रिश्तों की आंधी। मुझको तन्हा किया... Read more
सैलाब
हां नहीं रुकता है किसी के रोके, मेरे अश्कों का ये अविरल सैलाब सनम। हां रुके भी तो आखिर कैसे रुके, झट से टूटे,थे देखे... Read more
पकवान
अहा!शीत ऋतु लेकर आईं खुशियां और अनुराग हर घर पकते पकवान नये,हर घर की अलग है लाग। कहीं बाजरा खिचड़ी कहीं मक्का रोटी सरसों साग... Read more
सुबह
सुबह सवेरे शुरू हो जाती जीवन की आपाधापी भागम भाग दिनचर्या बनी है,हलचल विश्वव्यापी। उफ्फ!शरद की ऊषा,कोहरे के घूंघट में ठुमक चलत मतवाली ओस बनी... Read more
सूर्य
हुआ शांत देखो सूरज भी, जो भरी दुपहरी चिलचिलाता था। बारह घंटे की ड्यूटी से, वो थककर झल्लाता था। मैं,सूर्य और घर लौटते पंछी आपस... Read more
भूली बिसरी यादें
प्रेम की पाती सी, हिरणी जैसी मदमाती सी, हरित फसल लहलहाती सी,प्रेम सुधा बरसाती सी। फिर वही भूली बिसरी यादें आई । मधु में लिपटी... Read more
कविता
देख कर हाल अचला का,आज घबराया सा है चांद। कहीं हो जाए न प्रदूषित,सोच, ढूंढता सुरक्षित मांद। सुना है रहने वाले हैं आकर अब मुझपर... Read more
कामना
कामना......। दूर होकर भी सनम तुमसे,जगमगाती रही मेरी कल्पना चैन खोता रहा,रैन जाती रही,मुस्कुराती रही मेरी कामना । कुछ तुम गुम हुए, कुछ दूर हम... Read more
कविता
ढल रहा है क्षितिज तले भानु शिथिल होकर, हो रही अलंकृत सांझ, कुछ सुरमई सी होकर। बाट जोहती सिंदूरी संध्या फैली गगन में, पी से... Read more
खयाल
सुन, तेरी उल्फतों पर मलाल आ गया, बनी आंखें झरना,हाथ रुमाल आ गया। जब यूं ही बैठे बैठे खयाल आ गया, तब समंदर में दिल... Read more
कविता
क्यों पास होकर भी,कन्हैया तू दूर है मुझसे। अब तो हसरत ही नहीं बाकी,मेरी जीने में। नहीं रोना है पसंद,सांवरे तू जानता मुझको। क्या करूं... Read more
कविता
किया जाता है दुखी मन को कैसे हल्का? हाय! हमको भी तरीका वो सिखादे कोई कोशिशें तो की बहुत हंसने की तूने महफ़िल में नीलम... Read more
कविता
क्यों मेरे पास होकर भी, तू दूर है मुझसे। अब तो हसरत ही नहीं बाकी,मेरी जीने में। फिर उठा दर्द का समंदर सा,आज सीने में।... Read more
गिद्ध
जीवन की आपाधापी में सूनापन ही संग बस रह गया हाय,मतलबी गिद्धों के बीच इक ठूंठा तरु बस रह गया थी कभी हरियाली मम जिंदगी... Read more
थकान
मैं हुई प्रवासी दूर मंजिल की, कान्हा थकान हरो जीवन की। बीता यौवन इंतज़ार में, भ्रमित वचनों के खुमार में। मौन हुई वीणा मधुवन की,... Read more
दीप
Neelam Sharma शेर Oct 17, 2017
आलोक के अर्थात् का,दीप के दिव्यार्थ का। तम से नव प्रकाश का, वैभव के आकाश का। ज्योति-पर्व की शुभ बेला में,हर दीप की आस पुगे,... Read more
धनतेरस
धनतेरस है आ रहा ,छाया उर उल्लास, रिद्धि सिद्धि पावेंसभी,होवे सुख का वास। धनकुबेर अति शुभदिवस ,छाये खुशी अपार, घर में कुछ लाओ नया,सजे खूब... Read more
करवाचौथ
करवाचौथ सुनो,चाँद,विधु,सुधाकर,कलानिधि, निशापति, शशांक। तुम चन्द्र हो चांदनी निशा के और मेरे पिया हैं मेरे मयंक। साज-श्रृंगार मेरे साजन से,खुमार शुमार रहता साजन से। घर... Read more
उपेक्षा
उपेक्षा अनदेखी,अनवेक्षा,अवज्ञा,सब हैं,उपेक्षा कीसहेली लेकिन बारीक सा फर्क लिए अपेक्षा लगती इसकी भाएली। अवहेलना,अविनय,उदासीनता देती हृदय को दर्द है वहीं अपेक्षा दूसरों से,करती हर पल... Read more
कविता
प्रत्येक जीव से पूछ रहे, क्या खग मृग मधुकर श्रेनी जो बसती मम उर- हृदय, क्या तुम देखी सुमृगनैनी। अधर लगाइ रस दिया सीय पुष्प... Read more
वक्त
बांध कर घड़ी कलाई पर,भ्रम देखने का जिसको है। समय, वक्त और काल भला दिखा नीलम कब किसीको, मगर जीवन में वो ज़ालिम, सुनो,बहुत कुछ... Read more
कविता
जो छाया सफलता का तुझपे सुरूर है संभलकर दिवाने कदम आगे रखना, यही धीरे धीरे बनता घमंड और गुरूर है। खामोशियों का समंदर उबलता ज़रूर... Read more
निकलता है
सुन, हृदय हुआ जाता है मृत्यु शैय्या, नित स्वप्न का दम निकलता है। रोज़ ही मरते जाते हैं मेरे एहसास, अश्क बनकर के ग़म निकलता... Read more
कविता
सनम ग़म बहुत हैं दर्द-ए-दिल में रहती है सुनो टीस बहुत, है आह बहुत कराह बहुत रहती है सुनो, रंजिश भी बहुत। वज्रापात के आघात... Read more
प्रश्न चिन्ह
प्रश्न चिह्न? मैं कहाँ खड़ी हूँ? एक पथ है दो राहों का जिससे उलझन में पड़ी हूँ मन संशय और जीवन प्रश्न चिह्न फिर उलझन... Read more
दी है
ज़ुबां पर बंदिशें देखो, नीलम तुमने ही लगा दी हैं, हां,चाहत में नैनों से, नींद अपनी ही गंवा दी है हैं आंसू बेकरार कब से... Read more
कमी सी है
सुन, कुछ कमी सी है,आंखों में भी नमी सी है। समय निकला जा रहा नित,मुट्ठी से रेत सा, जिंदगी है रफ्तार में और सांसें थमी... Read more