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चांद का दर्पण
चांद का दर्पण पूर्ण चंद्र की दिव्य आभा से​ हुआ नील वर्ण पर्यावरण डूबा प्रेम में देख रहा है शशि, देखो क्षीर सिन्धु में दर्पण।... Read more
कविता
समाज हमारा बन रहा क्यों प्रताड़ना का बाजार मानवता हों रही कलंकित बनी वासना का औजार हो रहा निस काल विसंगत, बढ़ रहा व्यभिचार प्रलय... Read more
अक्स
Neelam Sharma गीत Jun 7, 2017
परछाई.....। स्नेहिल हो सजल नयनों से है कोटि-कोटि आभार व्यक्त। संग मेरे रहती ये सदा अदृश्य होकर,हर पल और हर वक्त। साथ नहीं देता जीवन... Read more
गीत
Neelam Sharma गीत Jun 7, 2017
आरे आरे। सुन, कहीं मत जाइयो दिलबर, मेरा दिल पुकारे आरे आरे। सुनो, नहीं सुनता दिल ये किसी की, अब तू ही समझा रे आरे... Read more
लगा है।
फिलबदीह -१३५ मिसरा- मरेंगे बिन तेरे लगने लगा है। काफिया- अने। रदीफ- लगा है। दिल मेरा तो है, आज़ाद पंछी, होकर उन्मुक्त, ये उड़ने लगा... Read more
लगी हैं।
उन्वान- जब से खामोशियां मुस्कुराने लगी हैं। जिंदगी भी मधुर गीत गाने लगी हैं। जब से खामोशियां मुस्कुराने लगी हैं। हुई शांत तृष्णा जो धधकती... Read more
देखते हैं।
रद़ीफ- देखते हैं। चुरा के वो हमको, नज़र देखते हैं। वो घड़ी दो घड़ी में गज़र देखते हैं। क्या रही मोहब्बत में मेरी,कसर देखते हैं।... Read more
अधूरी आस
Neelam Sharma गीत Jun 6, 2017
अधूरी आस......। सुनो, है सब कुछ पास मेरे फिर भी कुछ नहीं है पास । कुछ अधूरे से ख़्वाब हैं साथ न पूरे होने का... Read more
मुक्तक
जवानों चूक मत जाना, पडौसी घात करता है। फकत वो यार जूतों का न मुख से बात करता है। चलो फिर आज मिलके करदें, धूर्त... Read more
गुस्सा
क्रोध गुस्सा नाराज़गी नहीं ये है तेरी सज़ा की फरमानगी....... लाड लड़ाती है प्रेम जताती,देती तेरी उड़ान को परवाज़ मां जब भी गिरता लड़खड़ाता बच्चा,... Read more
बूंदें
हाइकु मेघ/बूंदें मेघ हैं छाये घनघोर घटाएं बूंदें बरसीं। काले नयना हैं बूंदें बरसाते अरमानों की। लेकर आया रिमझिम सीं बूंदें मेघ श्यामल। पीलीं धरा... Read more
दरमियां
उन्वान- दरमियां......। हर रोज़ न सही मगर कभी कभी दरमियां तेरे मेरे कुछ तो है अजनबी खींचता है मुझे किसी चुंबक की तरह। है अंजाना... Read more
सरहद के हालात
सरहद के हालात शूरवीर निर्भीक वीर और पराक्रमी योद्धा नौजवां सैनिक वो सुहाग,भाई और भारत मां के योग्य बेटे खोद देते हैं शत्रु की कबर... Read more
पर्यावरण
प्रकृति वसुधा परिवेश पर्यावरण पीड़ा में रहें हैं कबसे पुकार। अब तो अति हो गई मानव, अपना व्यवहार सुधार। मुक्तक अश्रुपात अभियोग शोक संग प्रकृति... Read more
चांदनी रात है।
Neelam Sharma गीत Jun 4, 2017
आज चांदनी रात है, पिया भी साथ हैं। इठला रही रजनी मन में सहेजे असीम उल्लास हैं। देखो प्रेमी युगलों का आया, आज मधुमास है।... Read more
धागे
धागे मजबूत डोर होते हैं, अनमोल रिश्तों के धागे। कभी भी जो नहीं टूटे, हैं मजबूत जोड़ ये धागे। हर समस्या का हैं होते,सफल तोड़... Read more
सीख लिया है।
Neelam Sharma गीत Jun 3, 2017
ज़ख्मों पर पैमंद। सुनो, आजकल मैंने ज़ख्मों का मेकप करना सीख लिया है। तेरी भूली बिसरी यादों से मैंने ब्रेकअप करना सीख लिया है। आंखों... Read more
वियोग
Neelam Sharma गीत Jun 3, 2017
वियोग। इसका मिलन ही इलाज है, है ये लाइलाज, दिल का रोग। हैं बहुत से सहते इसे,सारी उमर और लेते कुछ रिश्तों से जोग। जो... Read more
प्रकृति
हाइकु प्रकृति सुंदर सृष्टि सींचे इंद्रधनुष खुशी सिंदुरी। फैला गंदगी शोध समीक्षा करें मानव। बुढाये ख्वाब साझा धरा का कोना रोती प्रकृति। ढूंढते बच्चे खुशहाल... Read more
प्रकृति से संवाद।
Neelam Sharma गीत Jun 3, 2017
प्रकृति से संवाद......। वाह! अद्भुत! अप्रतीम ! अतीव सुंदर है अचला मेरी। क्या खूब कुदरत-सृष्टि एवं प्रकृति ने सजाई धरा मेरी। हे मां प्रकृति आज... Read more
तस्वीर
तस्वीर खींचकर कुछ आड़ी तिरछी लकीरें इक दिन कोरे कागज पर। मुझसे भोला बचपन बोला यह तस्वीर तुम्हारी है मां , और मुझे नन्हे हाथों... Read more
दीवारों के कान।
दीवारों के कान। निंदा करना छिपकर सुनना,इंसानों का अरमान। करते बदनाम दीवारों को कि इनके लग गये कान निंदा रस की चाशनी कानों में रस... Read more
बेवफा
हाइकु बेवफा शाम सिंदुरी हरजाई सूरज घर न लौटा। बसी रूह में कुछ यादें सुहानी बेवफा पिया। भोला मनवा हरजाई बालम रोज सताए। बूंदें शक... Read more
शर्म
हाइकु शरम/शर्म पर्दा न कर, शर्म आंखों की काफी खुद से डर। मन बांवरा शरम छोड़कर रहा मचल। शरम हया बस नाम के बचे कहते... Read more
किताबें
Neelam Sharma लेख Jun 1, 2017
किताब का बदलता स्वरूप। आधुनिकता और अपने बदलते स्वरूप से विचलित कल पुस्तक मेरे सपने में आई। बैठ समीप मेरे मुझको फिर अपनी व्यथा सुनाई।... Read more
सनम
Neelam Sharma गीत May 31, 2017
वल्गा- सनम कहूं खुदा की इनायत या तक़दीर का करम हुआ। ले तेरी चाहत,तेरी इबादत से आज तेरा सनम हुआ। हकीकत है,सपना है या फिर... Read more
मुक्तक
उन्वान- मुकद्दर, भाग्य, तक़दीर। कर रही नित नया प्रयास, मैं संवारने को तक़दीर। बन जाए तक़दीर मेरी,नित खोजूं नयी तद्वीर। भाग्य मुकद्दर और नसीब, किस... Read more
दर्पण
दर्पण हो अपलक कर रहा,प्रेयसी का मनुहार। है पिया मिलन को कर रही सुरभित पुष्प श्रृंगार। चंचल चितवन,चंदन सा बदन,है चंद्र सम आभा, नयनों में... Read more