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दीप
Neelam Sharma शेर Oct 17, 2017
आलोक के अर्थात् का,दीप के दिव्यार्थ का। तम से नव प्रकाश का, वैभव के आकाश का। ज्योति-पर्व की शुभ बेला में,हर दीप की आस पुगे,... Read more
धनतेरस
धनतेरस है आ रहा ,छाया उर उल्लास, रिद्धि सिद्धि पावेंसभी,होवे सुख का वास। धनकुबेर अति शुभदिवस ,छाये खुशी अपार, घर में कुछ लाओ नया,सजे खूब... Read more
करवाचौथ
करवाचौथ सुनो,चाँद,विधु,सुधाकर,कलानिधि, निशापति, शशांक। तुम चन्द्र हो चांदनी निशा के और मेरे पिया हैं मेरे मयंक। साज-श्रृंगार मेरे साजन से,खुमार शुमार रहता साजन से। घर... Read more
उपेक्षा
उपेक्षा अनदेखी,अनवेक्षा,अवज्ञा,सब हैं,उपेक्षा कीसहेली लेकिन बारीक सा फर्क लिए अपेक्षा लगती इसकी भाएली। अवहेलना,अविनय,उदासीनता देती हृदय को दर्द है वहीं अपेक्षा दूसरों से,करती हर पल... Read more
कविता
प्रत्येक जीव से पूछ रहे, क्या खग मृग मधुकर श्रेनी जो बसती मम उर- हृदय, क्या तुम देखी सुमृगनैनी। अधर लगाइ रस दिया सीय पुष्प... Read more
वक्त
बांध कर घड़ी कलाई पर,भ्रम देखने का जिसको है। समय, वक्त और काल भला दिखा नीलम कब किसीको, मगर जीवन में वो ज़ालिम, सुनो,बहुत कुछ... Read more
कविता
जो छाया सफलता का तुझपे सुरूर है संभलकर दिवाने कदम आगे रखना, यही धीरे धीरे बनता घमंड और गुरूर है। खामोशियों का समंदर उबलता ज़रूर... Read more
निकलता है
सुन, हृदय हुआ जाता है मृत्यु शैय्या, नित स्वप्न का दम निकलता है। रोज़ ही मरते जाते हैं मेरे एहसास, अश्क बनकर के ग़म निकलता... Read more
कविता
सनम ग़म बहुत हैं दर्द-ए-दिल में रहती है सुनो टीस बहुत, है आह बहुत कराह बहुत रहती है सुनो, रंजिश भी बहुत। वज्रापात के आघात... Read more
प्रश्न चिन्ह
प्रश्न चिह्न? मैं कहाँ खड़ी हूँ? एक पथ है दो राहों का जिससे उलझन में पड़ी हूँ मन संशय और जीवन प्रश्न चिह्न फिर उलझन... Read more
दी है
ज़ुबां पर बंदिशें देखो, नीलम तुमने ही लगा दी हैं, हां,चाहत में नैनों से, नींद अपनी ही गंवा दी है हैं आंसू बेकरार कब से... Read more
कमी सी है
सुन, कुछ कमी सी है,आंखों में भी नमी सी है। समय निकला जा रहा नित,मुट्ठी से रेत सा, जिंदगी है रफ्तार में और सांसें थमी... Read more
एहसास
प्रेम का एहसास है कुछ खास समझ लेता है हृदय नयनों की भाष। कुछ तो पा ही लेते हैं प्यार की मंजिल कुछ तड़पते हुए... Read more
पम्मी आंटी
(2) पम्मी आंटी सिर टोवल दा एवरेस्ट बना आई पम्मी आंटी मैं पैंजी त्वान्नू इक गल दस्सां,कह वजाई साड्ढी घंटी। कैंदा मोदी मन की बात... Read more
हिंदी
हिंदी लाचारी और व्यंग दिखता है नयनों में, चिंतन को ह्रदय हुआ विवश l 14 सितंबर आ गया फिरसे,देखो हम मना रहे हैं हिंदी दिवस... Read more
सिंदूर
सुन, नहीं चाहती कभी निकलना जन्म जन्मान्तर तक मैं प्रिय। बस डूबी रहना चाहती हूँ ,हैं जो सिन्दूरी से अहसास हिय। अद्भुत सा स्पंदन और... Read more
मुक्तक
?? तड़पनें दो दिलों की,सनम सिसकियां याद रखती हैं मधुर प्रीतम की यादों को, हिचकियां याद रखती हैं । भले बीते अनगिनत साल ,तेरे दिदार... Read more
बस यूं ही
कुछ यूं ही....... सुन,शोर से अधिक मुझपर, एकांत का असर होता है। वो पारदर्शी दर्पण है एकांत, जहां हर अस्तित्व मुखर होता है। माना कि... Read more
दर्पण हूं मैं
इतना प्यार भरा हृदय में,तू ही बता मैं तोलूं कैसे खामोश दर्पण बोल रहा है,मेरे उर की बोली जैसे। प्रेम-यज्ञ सम प्रीत हमारी, पुष्प अर्ग... Read more
गणपति
Neelam Sharma गीत Aug 26, 2017
रिद्धि सिद्धि स्वामी सुनो भरिय सुख संसार। मात-पिता पूजन प्रथम,सुजन हृदय उद्गार । श्वास समर्पित आपको ,श्रीगणपति जी महाराज, शत शत वंदन आपको, हों पूरण... Read more
मज़ाक
उन्वान- मज़ाक १) देखो हंसी मज़ाक में ये क्या हो गया। बाराती बनकर गये थे और ब्याह हो गया। स्वच्छंद धवल कपोत सम थी अपनी... Read more
गज़ल
इतना प्यार भरा हृदय में,तू ही बता मैं तोलूं कैसे खामोश दर्पण बोल रहा है,मेरे उर की बोली जैसे। प्रेम-यज्ञ सम प्रीत हमारी, पुष्प अर्ग... Read more
गज़ल
बहुत दिनों बाद, आप सभी को सादर प्रणाम एवं सादर प्रेषित एक प्रयास क़ाफिया- आस। रद़ीफ - किसको है। काफ़िये के उदाहरण - विश्वास,पास,मधुमास,कयास, गिलास,... Read more
अनुप्रास अलंकार
सादर प्रेषित हर पल घटता झीना झरना सम, जीवन जल है। शनै:शनै: कम होती आयु,त्वम जीवन छल है। रह रह रतिभ्रम में मानव हृदय विकल... Read more
करुण रस
है बैठी भू,वसुधा,अति सुन्दरी भावुक और चिन्तालीन प्रदूषण,प्रलय भय से व्याकुल,स्वर्णिम हुई अति मलीन। नवल कोमल सौरभ मय सुंदर सरसिज शोभा कभी पाते थे तितली,बुलबुल,... Read more
इनायत
इनायत,अनुग्रह,सच्ची कृपा, उपकार,दया,मेहरबानी हैं बहुत मुझपे,मेरे,तेरे कान्हा, नहीं तुमसा कोई सानी। हुई जिसपे भी मेरे मोहन इनायत तेरी तेरे भक्त,सखा, रिश्ते सब आबाद रहे। बाग़बाँ... Read more
कविता
चाहो उड़ालो हमारी हसीं,हंसता हर पल छोड़ जाऊंगा। सुन मैं तो झोखा हूं हवाओं का साथ उड़ा ले जाऊंगा। मैं तो बहता दरिया हूं ए... Read more
मेरा वतन
मेरा वतन गा रहा जयगाथा जन गण और वंदेमातरम,मेरा वतन। छा रहा नव आसमां पर, अनवरत अभिराम,मेरा वतन। रहे ओजस्वी सदा,बनें अस्मिता का प्रतिमान,मेरा वतन।... Read more
हे कृष्ण तुम कहां हो
सादर प्रेषित स्वरचित पिताजी अखबार की खबरें पढ़ते हुए एकाएक बोले,हे भगवान न जाने क्या कुछ और देखना-सुनना लिखा है इस योनि में। मां पूजा... Read more