Skip to content
ओस
ओस अहा! प्रभात ऊषा बेला में,किसने छिड़की ओस की बूंदें। श्वेत धवल मोती की सी लड़ी, होती ओस की बूंदें। कौन जोहरी है गया भूल,ये... Read more
गीत
चयनित मुख्य शब्द-बोले- कहा, सांस, पलकें,झूकी,उठी, पर्यायवाची-हौले- धीरे, मद्धम,धीमे,दबी दबी- हल्के से, धीरे से, बिना बोले-अमूक, चुप,आंख-नयन, नज़र, निगाह,रब- मौला,वक्त - ग़ज़र,ख्वाब- सपना स्वप्न, मूल... Read more
उपवन
सुन,मनु यह जीवन है उपवन,उपवन में फूल सहस्त्र हज़ार। चंपा, चमेली से खूब खिले मन,जुही, कचनार से आए बहार। हरित चुनरिया धरा ने ओढ़ी,सुमनों से... Read more
कविता
#आखर_व्यूह_ भेदन न पूछो हमसे कि क्या हाल-ए-दिल का है आलम, नसीब में सुन लिखा फकत इंतज़ार तेरा बालम। रुह-ए नज़र की चाहत है बस... Read more
बीस वर्ष
हमें २० वीं सालगिरह की हार्दिक मंगलकामनाएँ एवं मांगलिक शुभकामनाएँ। परिणय सूत्र के बीस साल, आज हुए हैं भूतकाल। तोता मैना युगल जैसे हों, अपने... Read more
कोहरा
कोहरा लाख समझाया पर न माना, देखो अब दिल रो रहा। कैसे अपना हाथ थामे कि घना है कोहरा। हमने सोचा हमने तो जीत ली... Read more
१८ जन्मदिन
🎂🎂😘🎂🎂😘🎂🎂😘🎂🎂😘🎂🎂😘 मेरे प्राण,मेरे प्रिय हृदय पुष्प और मेरे नयनों के तारे आज जन्मदिन है तेरा,तुझे सुख मिलें वैभव सारे। हो मुबारक जन्मदिवस का मधुमय ज्योतिर्मय... Read more
गंगा
विद्या- कविता विषय- गंगा हे सुरधुनि, सुरनदी, सुरसरि, सुरापगा, हे नदीश्वरी, मंदाकिनी, विष्णुपदी, देवापगा। हे सरयू त्रिपथगामिनी,गंगा, जाह्नवी,त्रिपथगा देव सरिता। हे जीवन दायिनी भागीरथी, शिव... Read more
राहगीर
शब्द - मुसाफिर हे पंथी,राही,अथक राहगीर पथ भूल न जाना पथिक कहीं । सुन पथ में बहुत हैं तीक्ष्ण शूल, तो कष्ट अत्यधिक होंगे हीं।... Read more
तिमिर
तिमिर सुन,स्याह तिमिर के पीछे देखो,झांक रहे हैं उजियारे हटाकर घटा तम की,कर उजास अंधियारे जो गलियारे। क्यों चुरा बैठी है अमा तू झिलमिलाते चांद... Read more
सालगिरह
Neelam Sharma गीत Nov 21, 2017
सालगिरह नहीं दूर हुई पिया अपनी विरह ले फिर से आई सालगिरह। रही पीर शेष और दर्द हिया, कभी सुध तुमने नहीं लीन्हीं पिया। आखिर... Read more
किस्मत
सुन,लगी है फिर से रेस,मुझमें और मेरे हालात में। देखो बैठी है मेरी किस्मत लगाकर अचूक घात में। मैं तो उलझनों से उभरने का खोज... Read more
प्रेम पाती
लिखते लिखते पाती तुमको, कितनी सुबहें शाम हो गई। खत के उसके इंतजार में, सारी जिंदगी तमाम हो गई। भूल न पाऊं तेरी बातें खत... Read more
बीस वर्ष
दिल के अरमान, सुनहरे सपनों की डोर पिया है तुमसे बांधी। तुमसे रिश्ता मेरा नहीं तोड़ पाई, तुम्हारे कुछ रिश्तों की आंधी। मुझको तन्हा किया... Read more
सैलाब
हां नहीं रुकता है किसी के रोके, मेरे अश्कों का ये अविरल सैलाब सनम। हां रुके भी तो आखिर कैसे रुके, झट से टूटे,थे देखे... Read more
पकवान
अहा!शीत ऋतु लेकर आईं खुशियां और अनुराग हर घर पकते पकवान नये,हर घर की अलग है लाग। कहीं बाजरा खिचड़ी कहीं मक्का रोटी सरसों साग... Read more
सुबह
सुबह सवेरे शुरू हो जाती जीवन की आपाधापी भागम भाग दिनचर्या बनी है,हलचल विश्वव्यापी। उफ्फ!शरद की ऊषा,कोहरे के घूंघट में ठुमक चलत मतवाली ओस बनी... Read more
सूर्य
हुआ शांत देखो सूरज भी, जो भरी दुपहरी चिलचिलाता था। बारह घंटे की ड्यूटी से, वो थककर झल्लाता था। मैं,सूर्य और घर लौटते पंछी आपस... Read more
भूली बिसरी यादें
प्रेम की पाती सी, हिरणी जैसी मदमाती सी, हरित फसल लहलहाती सी,प्रेम सुधा बरसाती सी। फिर वही भूली बिसरी यादें आई । मधु में लिपटी... Read more
कविता
देख कर हाल अचला का,आज घबराया सा है चांद। कहीं हो जाए न प्रदूषित,सोच, ढूंढता सुरक्षित मांद। सुना है रहने वाले हैं आकर अब मुझपर... Read more
कामना
कामना......। दूर होकर भी सनम तुमसे,जगमगाती रही मेरी कल्पना चैन खोता रहा,रैन जाती रही,मुस्कुराती रही मेरी कामना । कुछ तुम गुम हुए, कुछ दूर हम... Read more
कविता
ढल रहा है क्षितिज तले भानु शिथिल होकर, हो रही अलंकृत सांझ, कुछ सुरमई सी होकर। बाट जोहती सिंदूरी संध्या फैली गगन में, पी से... Read more
खयाल
सुन, तेरी उल्फतों पर मलाल आ गया, बनी आंखें झरना,हाथ रुमाल आ गया। जब यूं ही बैठे बैठे खयाल आ गया, तब समंदर में दिल... Read more
कविता
क्यों पास होकर भी,कन्हैया तू दूर है मुझसे। अब तो हसरत ही नहीं बाकी,मेरी जीने में। नहीं रोना है पसंद,सांवरे तू जानता मुझको। क्या करूं... Read more
कविता
किया जाता है दुखी मन को कैसे हल्का? हाय! हमको भी तरीका वो सिखादे कोई कोशिशें तो की बहुत हंसने की तूने महफ़िल में नीलम... Read more
कविता
क्यों मेरे पास होकर भी, तू दूर है मुझसे। अब तो हसरत ही नहीं बाकी,मेरी जीने में। फिर उठा दर्द का समंदर सा,आज सीने में।... Read more
गिद्ध
जीवन की आपाधापी में सूनापन ही संग बस रह गया हाय,मतलबी गिद्धों के बीच इक ठूंठा तरु बस रह गया थी कभी हरियाली मम जिंदगी... Read more
थकान
मैं हुई प्रवासी दूर मंजिल की, कान्हा थकान हरो जीवन की। बीता यौवन इंतज़ार में, भ्रमित वचनों के खुमार में। मौन हुई वीणा मधुवन की,... Read more