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शिक्षा : पोस्ट ग्रेजूऐट अंग्रेजी साहित्य तथा सोसियल वर्क में ।
कृति: सांझा संकलन (काव्य रचनाएँ ),अखंड भारत पत्रिका (काव्य रचनाएँ एवं लेख ) तथा अन्य पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित ।
स्थान : अल्मोडा

All Postsकविता (12)गज़ल/गीतिका (3)मुक्तक (1)गीत (2)
शपथ
शपथ है तुमको मेरे दोस्त मेरे जाने के बाद रस्म की मेरी कोई गुजारिश न होगी बस छोटी सी ख्वाहिश मेरे कफन में तिंरगे की... Read more
दीवारें
दीवारें बहुत लंबी उम्र लेकर आती है इंसान से भी अधिक  पर एक समय के बाद उनमें पसरी नमी,सीलन से बस वे छुने भर से... Read more
गजल
नुमू  की हसरतों में  दिल औ दरख्त खुलता गया कब मंजिलें  मेरे करीब आयी  पता ही न चला । वो सब्ज़बख़्त कह कर  उम्रभर सँवारते... Read more
प्रारब्ध
मुद्दतों बाद कुछ कदम खुद के लिए थे खुरदरी सी सतह पर । कब से यूँ ही अनजाने भटक रहे थे किसी अनकही राह पर... Read more
सुदामा
हतप्रभ हूँ सुदामा आज तुम किस कृष्ण से मिले कभी तुमने महसूस किया सखा भाव में जैसे जंगली नर्म सी दूब खुद उग आयी है... Read more
बुलबुला
पानी के कई अनगिनत से बताशे रोज मेरे खेलों में बनते बिगड़ते है आज फिर खुब चमकता सा एक बुलबुला अनायास हवा में गुम होता... Read more
फाल्गुन
वो सारी वर्जनायें तोड़ कर नाचने दे झूम झूम कर आज गाने दे कोई राग मुझको भी सजाने दे साज । भुली मैं सारी की... Read more
आदमी में गांव
किसी पुरानी किताब के कई छुटे पन्ने धुमिल स्याही के आखरों जैसे क्ई गांव बुड़ा गये और कुछ पलायन में खो गये, व निगल गयी... Read more
कस्तुरी
इस अक्षांश में जैसे मुझे मेरे अंदर की कस्तुरी से विमुक्त कर मेरे मन का शोर मौन को तोड़ता रहा बारम्बार उन्मुक्त हो । जाने... Read more
गजल
वक्त के सितम यूँ सिलसिलों से, गुजरते चले गये ! बेख्याली में यूहीं हम,तेरा इंतजार करते चले गये !! मेरे शहर की हवा भी कुछ,बदली... Read more
समाज
एक दूसरे के पुरक मानव व समाज खोजते हैं आपस में अच्छे लोग,अच्छे दिन संस्कार एवं सभ्यतायें सुंदर भारत समृद्ध गाॅव साफ राजनीति बेदाग नेता... Read more
हर बार की तरह
धूप से दिये जलायें आशाओं के कहीं जुगनु मिल जायें अंधेरों में, बीता साल ढलती सांझ में सोते सुरज को, थपकी दे रहा हो, दे... Read more
अभिव्यक्ति
कुछ मौन होती अभिव्यक्ति जो आज स्मरण हो आयी मानस में ताजी बर्फ में चीनी घोल खाना हथेली में बर्फ देर तक रखने में रिकार्ड... Read more
गीतिका छंद
नील गगन धरणी तक,सूर्य चन्द्र मीत से तम  विलय उजास में,पुष्प रंगों में खिले । प्रकाशमय प्रकाशमय, वे कर्मवीर बढ़ रहे पतन के विनाश को... Read more
बडा हो गया बचपन
जादू की पोटली अलादीन के चिराग रंगीन सी बातों रंगों ,सपनों में गुम चंपक नंदन की बातें कागज की नाव लकडी मिट्टी के खिलौने अब... Read more
महक
जिसने मुफलिसी न देखी हो वो क्या सच में गीत भाव रचेंगे ! सोचो!रोटी कपडा मकान को लाँघ, आगे गयी जिनकी भूख व चाह !... Read more