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क्रांतिकारी
विषय- *क्रान्तिकारी* विधा- *मुक्तक* बहर- *१२२२ १२२२ १२२२ १२२२* मिटा आज़ाद का सपना, नही आज़ाद भारत है। सभी को नोट की चाहत, वतन से भी... Read more
बेरोजगारी
जनसंख्या के कोप का भाजन नौजवान बन जातेे है। रोजगार की चिंता में मर अब सब किसान मर जाते है॥ सब कार्य जब यंत्र करेंगे... Read more
रिश्ता
विषय- *रिश्ता* रिश्तों का अब कत्ल हो रहा सरेआम बाज़ार में। पतन मानव का हो चला बर्ताव मे आचार में॥ बेटे ने अब माता का... Read more