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आज़ादी कैसे मनाये
गांव शहर बनता गया, शहर पत्थरो से घिरता गया, आज़ादी कैसे मनाये, गौरैयों का आशियाँ उजड़ता गया, संस्कृतियां किताबो की मोहताज बनती गई अपनापन खालीपन... Read more
मेरे अंश
मेरे अंश तुझे मैं सुख दूंगी मैं शक्ति बन तुझको बल दूंगी स्वार्थियों से भरे इस समाज मे मैं तुझको निःस्वार्थ जीवन दूँगी फर्क नही... Read more
बेटी
शक्ति का संचार है बेटी भक्ति का द्वार है बेटी मुक्ति का मार्ग है बेटी सृजन संसार है बेटी मन का भाव है बेटी रामायण... Read more