Skip to content
धूप
मंद मंद मुस्काती धूप सकुचाती, शर्माती धूप आवारा मेघों के डर से घूंघट में छुप जाती धूप आंख-मिचौली खेल रही है छत पर आती जाती... Read more
बिटिया रानी
बिटिया मेरी,रानी बन पढ.,लिख,सुघड़ सियानी बन ज्योत नहीं मेरे कुल की नक्षत्रा आसमानी बन पाहन को निर्दम्भित कर बहता दरिया तूफानी बन विष पीना तज... Read more
पिता
पिता जीवन की शक्ति है,जन्म की प्रथम अभिव्यक्ति है, पिता है नींव की मिट्टी,जो थामे घर को रखती है पिता ही द्वार पिता प्रहरी ,सजग... Read more
मुक्तक
हुनर उनको जीने का आया नहीं है अदब से जो ये सिर झुकाया नहीं है भले कद है उनके फ़लक से भी ऊँचे मगर उन... Read more
जब चाहा जी तब बदल गया थोङा सा नहीं सब बदल गया ढब बदला तूने जीवन का अब कहता है रब बदल गया खुदगर्ज हुआ... Read more
मैं हूँ ज़िंदा तुझे एहसास कराऊं कैसे
धङकनें मैं तेरे कानों को सुनाऊं कैसे बंदिशें तोङ तेरे सामने आऊं कैसे मुझको बेजान समझ दूर करे क्यों तन से मैं हूँ ज़िंदा तुझे... Read more