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बाल्यकाल से ही कविता, गीत, ग़ज़ल, और छंद रहित आधुनिक कविताएँ लिखना मेरा शौक रहा है कुछ गीतों को स्वर भी दिया गया है !
"गज़ल गीतिका" मेरा सम्पूर्ण संग्रह है

All Postsकविता (7)गज़ल/गीतिका (8)गीत (2)
बहार ही बहार
" बहार ही बहार " खिल रहे हैं फूल यहाँ डाल डाल पर, आज है बहार ही बहार ज़िन्दगी ! मधुप चूसते भँवर फूल फूल... Read more
आस्तीनों में
सांप आस्तीनों में पल न पायेंगे हमारे दुश्मन हमें छल न पायेंगे मंजिल तक पहुंचना आसाँ नहीं ये रस्ते सफर पे चल न पायेंगे जितने... Read more
पहली पहली बार
यादों में वो लम्हे बसे हों पहली पहली बार राहों में हम तुम मिलें हों पहली पहली बार पिघल के मेरी बाहों में समाये तुम... Read more
सफीना
क्यों ग़मों मे बशर डूबता जा रहा है फासला इंसानों में बढ़ता जा रहा है मुल्क का जाने क्या अन्जाम होगा नेतागिरी का पारा चढ़ता... Read more
शायराना
शहरे मौसम बड़ा आशिकाना हुआ दिल मेरा कुछ पागल दीवाना हुआ घर से बाहर पाँव तो निकालें ज़रा तुमको देखे हमें अब ज़माना हुआ चन्द... Read more
हवा
सुलगती आग को और भड़का देगी हवा धुँआ बहुत दूर तक उड़ा ले जायेगी हवा साया-ऐ-शजर पर भरोसा नहीं कीजिये जानें कब दरख्तों को गिरा... Read more
मिलन ऋतु
मिलन ऋतु आयी दीवानी बरसात, भीगी भीगी हो गयी, बौराया मौसम, छू कर भीगा भीगा यौवन, आँखें कजरारी बहकी बहकी हो गयीं, होंठ साँसों के... Read more
सोने की चिड़िया
एक रंग बिरंगी, आकर्षक,बहुत निराली थी चिड़िया, तिनका तिनका तोड़ जोड़ कर,रहने आई थी चिड़िया! बड़े वृक्ष की ऊंची शाख पर, छोटा अपना घर बना... Read more
बकलोल
"बकलोल" खून के रिश्ते बहुत अनमोल होते हैं सियासत में यहाँ पे भी झोल होते हैं ! भूख में सत्ता की सबक भूल जाते हैं... Read more
गुंजाइश
तू साथ है तो ज़िन्दगी भी ख्वाइश है वरना ये महफिल तो एक नुमाइश है कैसे इशारों इशारों में होतीं हैं गुफ्तगू हमारी मोहब्ब्त की... Read more
कृतिम ज़िन्दगी
मैं मौत नहीं, मैं जीवन हूँ, ज़िन्दगी के बोझ से, बुझा बुझा सा हूँ, मेरा जीवन कृतिम है, मेरी मौत कृतिम होगी, इसी लिए, कि... Read more
मिलन
साहित्यपीडिया पर मेरे मिलन का एहसास, मेरी पहली रचना जो १९६५ के आस पास लिखी गई थी 'मिलन' का मिलन मुबारक हो तुझे मैं जो... Read more