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अभी खुद को समझने की कोशिश में हूँ। इसी प्रयास में जब भावनाये हद से बेहद हो जाती है तो कविता ग़ज़ल या लघुकथा बन जाती है।

All Postsकविता (1)मुक्तक (1)लघु कथा (1)
तोटक छंद
तोटक छंद तज के जग के हर बंधन को अब बैठ गई मन मंथन को मनुहार करूँ भगवान यही नित दे मुझको अभिज्ञान सही अभिमान... Read more
मुक्तक
इरादा खुदकुशी का था, इसी से प्यार कर बैठे इरादा कत्ल का भी था, कि हम इकरार कर बैठे इरादा भी था बादल का, मोहब्बत... Read more
नाक
नाक " जब तुमसे कह दिया कि नाक छिदवा लो तो समझ में नहीं आता!", प्रकाश ने परिधि से नाराज़ होते हुए कहा। " मगर... Read more